अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को एक महिला के लॉकर से 47 लाख रुपये मूल्य के आभूषणों के गबन के लिए मुआवजा देने का निर्देश दिया है। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति संगीता धींगरा सहगल और सदस्य बिमला कुमारी की खंडपीठ ने मोनिका मारवाह बनाम यूनियन बैंक ऑफ इंडिया मामले में यह आदेश पारित किया। आयोग ने कहा कि बैंक यह साबित करने में विफल रहा कि लॉकर सरेंडर किया गया था या उसकी सामग्री शिकायतकर्ता को वापस की गई थी।
आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा, शिकायतकर्ता और उनके दिवंगत ससुर के लॉकर की सामग्री की कोई रसीद प्रतिपक्षी पक्ष द्वारा कथित सरेंडर के समय प्रदान नहीं की गई। इससे स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता की वस्तुओं का गबन किया गया और उन्होंने कभी अपना लॉकर सुविधा सरेंडर नहीं की। मामले के अनुसार, मोनिका मारवाह और उनके ससुर का जॉइंट लॉकर 1998 से यूनियन बैंक की नारायणा विहार शाखा में था। ससुर ने 2005 में लॉकर का संचालन किया था और उनकी मृत्यु 29 अगस्त 2010 को हो गई। जब मोनिका 1 सितंबर 2018 को लॉकर खोलने पहुंचीं तो बैंक ने बताया कि लॉकर 22 जनवरी 2015 को ही सरेंडर कर दिया गया था। मोनिका ने बैंक के इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि उन्होंने कभी लॉकर बंद करने का अनुरोध नहीं किया था और न ही उन्हें कोई सूचना मिली थी। उन्होंने लगभग 47 लाख रुपये मूल्य के आभूषण गायब होने का आरोप लगाया। आयोग ने नोट किया कि बैंक ने लॉकर सरेंडर की कोई रसीद या मोनिका द्वारा सरेंडर का अनुरोध करने वाला कोई पत्र पेश नहीं किया। यहां तक कि अगर बैंक की गलती सद्भावनापूर्ण भी हो, तो भी सरेंडर का सबूत पेश करना जरूरी था। आयोग ने यूनियन बैंक को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता को 47 लाख रुपये का भुगतान करे। साथ ही 1 सितंबर 2018 से 27 अक्टूबर 2026 तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा। यह भुगतान दो माह के अंदर करना होगा।