रामराज्य के निर्माण के संकल्प के साथ हिंदू जनजागृति समिति ने हिंदू राष्ट्र अधिवेशन आयोजित करने की घोषणा की है। श्रीनिवास पुरी स्थित भारत सेवाश्रम संघ में 22-24 नवंबर तक अधिवेशन चलेगा जिसमें 110 हिंदू संगठनों के 225 प्रतिनिधियों के साथ बांग्लादेश के हिंदू संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। अधिवेशन में देश और धर्म संबंधी चुनौतियों के साथ ही मंदिरों को भक्तों के हाथों में सौंपने की चर्चा के साथ समान नागरिक कानून पर आम राय बनाई जाएगी।
हिंदू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगले ने प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वाता में कहा कि अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण का न्यायालयीन मार्ग प्रशस्त हो गया है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1975 में आपातकाल के दौरान डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के मूल संविधान में परिवर्तन कर सेक्युलर शब्द जोड़ दिया था। तब से भारत में सेक्युलरवाद का उपयोग केवल अल्पसंख्यकों के तुष्टीकरण के लिए किया जा रहा है। जबकि सभी नागरिकों को एक समान अधिकार देने के लिए समान नागरिक कानून की आवश्यकता है। अधिवेशन में समान नागरिक कानून पर आम राय बनाई जाएगी।
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के प्रवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि देश में बढ़ रही सामाजिक दुष्प्रवृत्तियों को रोकने के लिए हिंदू राष्ट्र अधिवेशन का आयोजन किया जा रहा है। प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट पर अधिवेशन में मंथन किया जाएगा। सनातन संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता चेतन राजहंस ने कहा कि संविधान के तहत हिंदू राष्ट्र की मांग अधिवेशन में की जाएगी। साधना के बल पर आत्म बल बढ़ाने का काम हिंदू संगठन करेंगे। हिंदू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता रमेश शिंदे ने कहा कि शासनतंत्र द्वारा केवल मंदिरों का अधिग्रहण किया जाना गंभीर है। सेक्युलर शासन को मंदिरों की व्यवस्था करने का कोई अधिकार नहीं है। अधिवेशन में इस बात की चर्चा भी की जाएगी।