अभी हाल ही में प्रदेश सरकार द्वारा पंचायत चुनावों में शैक्षणिक योग्यता लागू करने के फैसले पर जैसे ही पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक याचिकाकर्ता की सुनवाई पर अपील करते हुए इस फैसले पर रोक लगाई तो मेवात में अनपढ़ नेताओं की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
मेवात के अनपढ़ सरपंच रहे उमीदवारों न केवल कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया बल्कि उनके लिए इसे न्याय प्रिय भी बताया है। हालांकि अभी इसकी सुनवाई 28 अगस्त को होनी बाकी है।
गौरतलब है कि पंचायत चुनाव लड़ने के इच्छुक अनपढ़ उमीदवारों को भाजपा शासित मंत्रीमंडल ने उस समय एक बडा झटका दिया था जब सरकार ने इसी महीने पंचायत चुनावों से ऐन पहले सरपंच पद के लिए 10वीं पास को वरीयता देने का निर्णय लिया था।
सरकार के इस फैसले से न केवल मेवात के अनपढ़ नेताओं को तगड़ा झटका लगा था बल्कि उनके मंसूबों पर भी पानी फिर गया था। बता दें कि देश की राजधानी से सटे मेवात इलाके में साक्षरता दर हमेशा से ही कम रही है।
इसी के चलते हमेशा से ही पंचायत या स्थानीय निकाय चुनावों में अकसर अनपढ़ लोगों का ही बोलबाला रहा है। लेकिन इसी माह सरकार ने हरियाणा के इतिहास में एक ऐसा फैसला सुनाया था जिससे पंचायत चुनाव लड़ने वाले अनपढ नेताओं के होश उड गए थे।
सरकार के इस फैसले का मेवात में इलाके में भारी विरोध दिखाई दिया था। ओर कुछ ने सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले का स्वागत किया था।
क्या कहतें हैं लोग:-
सरकार ने पंचायत चुनावों में ऐन मौके पर जो शैक्षणिक योग्यता वाला फैसला सुनाया था वो सरासर गलत था। इसे सरकार को वापिस लेना चाहिए। ऐसे फैसले अचानक थोपना प्रदेश हित में नहीं हैं:- मौलाना ताहिर हुसैन।
मौजूदा भाजपा सरकार अनुभवहीन है, सरकार जब प्रदेश में चुनावों में शैक्षणिक योग्यता लागू करना चाहती है तो इसकी शुरुआत उसे एमपी या एमएलए से करनी चाहिए थी न की पंचायत या निकाय चुनावों से, सरकार की अब इसी में भलाई है कि वह हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करें अन्यथा नहीं तो उन्हें प्रदेश की जनता का विरोध झेलना पडेगा। :- शमशूदीन गूमल, इनेलो नेता मेवात।
प्रदेश में पंचायत चुनावों में शैक्षणिक योग्यता लागू होना जरुरी है। इससे पढ़े लिखे युवा जब गांवों की जिमेदारी संभालेंगे तो गांवों का विकास होगा। अगर अनपढ़ सरपंच होंगे तो विकास कार्य प्रभावित होना लाजमी हैं। प्रदेश के लोगों को सरकार के इस फैसले का स्वागत करना चाहिए न कि विरोध:- आलम खान समाजिक कार्यकर्ता।