दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेस-वे पर फर्राटा भरते वाहनों की ठीक उलट तस्वीर शहर के अंडरपास के नीचे देखने को मिलती है।
तकनीकी स्तर पर खामियों के चलते शहर के कई अंडरपास वाहन चालकों के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। अपेक्षाकृत संकरे और बनावट में खामियों के चलते कई बार वाहन आपस में टकरा जाते हैं।
सेक्टर-31, झाड़सा चौक समेत कई अंडरपास हैं, जहां से वाहन चालकों को गुजरते वक्त उन्हें दुर्घटना का खतरा रहता है। ऐसे ही खतरों के अंडरपास की स्थिति का जायजा अमर उजाला संवाददाता ने लिया तो वाहन चालकों की परेशानी सामने झलक आई।
यहां हमेशा बना रहता है दुर्घटना का खतरा
ओल्ड गुड़गांव और नए गुड़गांव को जोड़ने वाले सेक्टर-31 अंडरपास काफी संकरा है। इसके नीचे से गुजरते वक्त हमेशा वाहन चालकों को दुर्घटना का खतरा बना रहता है। ट्रैफिक सिग्नल के बावजूद यहां पर वाहन चालक जान जोखिम में डालकर निकल जाते हैं। कहीं से कभी भी कोई वाहन निकलकर आ जाता है। कई बार यहां पर वाहन चालक आपस में टकरा चुके हैं। प्रशासन के ठोस कदम नहीं उठाने से स्थिति जानलेवा होते जा रही है।
जाम होता है यहां आम
सबसे व्यस्तम चौराहे में से गिने जाने वाले झाड़सा चौक के अंडरपास को इस तरह बनाया गया है कि यहां पर थोड़ा सा वाहनों का दबाव बढ़ते ही जाम की स्थिति बन जाती है। अंडरपास के नीचे दोनों साइड डिवाइडर से वाहनों को डायवर्ट किया जाता है। ऐसे में सेक्टर-15 की तरफ से आने वाले वाहनों के राजीव चौक की तरफ जाने के लिए आमने-सामने की स्थिति बनने से जाम लग जाता है। ऐसे में कई बार यहां पर भीषण दुर्घटनाएं भी देखने को मिली हैं।
ये हैं कुछ सुझाव
-सेक्टर-31 अंडरपास पर ट्रैफिक नियंत्रण को प्रभावी बनाया जाए। ट्रैफिक लाइट को दुरुस्त कराने के अलावा पीक आवर्स में ट्रैफिक पुलिस को मुस्तैद किया जाए।
-झाड़सा चौक पर ट्रैफिक लाइट को दुरुस्त कराने के अलावा ट्रैफिक नियंत्रण सख्त किया जाए।
-राजीव चौक, सिग्नेचर टावर चौक पर वाहनों की गति पर नियंत्रण रखा जाए।
अब तक 1333 गंवा चुके हैं जान
बीते तीन सालों में सड़क दुर्घटना में हुई मौत के आंकड़े लगातार बढ़ते जा रहे है। तीन सालों में 1333 सड़क दुर्घटना में 1403 व्यक्ति अपनी जान गंवा चुके हैं। इसमें 552 पैदल यात्रियों के अलावा, 81 साइकिल सवार, 462 दो पहिया वाहन चालक, 74 थ्री व्हीलर/सवारी, 140 हल्के वाहन के अलावा 94 भारी वाहनों के चालक और सवारियों की मौत हुई है। इनमें एनएच आठ के अलावा अंडरपास के नीचे हुई सड़क दुर्घटना के मामले हैं।
आंकड़े बताते हैं
वर्ष................दुर्घटना में मौत
2011....................439
2012...................456
2013...................487
वाहन चालकों की परेशानी
कार चालक योगेश का राजपूत का कहना है कि पीक आवर्स में कई अंडरपास से वाहन को निकालना मुश्किल हो जाता है। वाहनों का आवगमन ऐसा रहता है कि पता ही नहीं वाहन कहां से निकल आए। ऐसे में दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
वहीं वाहन चालक प्रोबल बनर्जी कहते हैं कि रात के समय अंडरपास पर ऐसी स्थिति बनी रहती है कि किसी ओर से गाड़ी आ जाए,
पता ही नहीं चलता। इस दौरान दुर्घटना का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ जाता है। इन
अंडरपास के नीचे से प्रतिदिन प्रशासनिक अधिकारी गुजरते हैं, लेकिन यहां
व्यवस्था बनाने के लिए कोई ध्यान नहीं देता।