उत्तर-पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त आशीष मिश्रा ने एक परिजन के हवाले से बताया कि जहीर अपनी बुआ की बेटी से अक्सर बातचीत करता था। यह बात दोनों परिवारों को पता भी थी। बुआ का परिवार जहीर को पसंद नहीं करता था। 7 जून को बकरीद के दिन जहीर गली में खड़े होकर इशारों से अपनी बुआ की बेटी से बात कर रहा था। इसी बीच उसके फूफा काशिम वहां पहुंच गए।
आरोप है कि उन्होंने जहीर को जमकर पीटा। भीड़ जमा होने पर जहीर को छोड़ दिया। इधर, जहीर डर की वजह से अपने घर नहीं गया। वह मुस्तफाबाद अपने कारखाने चला गया। जहीर को कपड़ों की जरूरत पड़ी तो उसने बुधवार को अपने परिजनों को फोन किया और कपड़े लेकर जाफराबाद आने के लिए कहा। पुलिस के मुताबिक इस बात की भनक किसी तरह काशिम को लग गई। आरोप है कि तीनों मौके पर पहुंचे और दौड़ा-दौड़ाकर जहीर को मारा और चाकू से गोदकर हत्या कर दी। वारदात जहां अंजाम दी गई वह इलाका उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सीलमपुर थानाक्षेत्र में आता है।
मना करने पर नहीं माना जहीर
पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ के बाद बताया कि काशिम कई बार जहीर को बेटी से दूर रहने के लिए कह चुका था। इसके बाद भी जब वह नहीं माना तो आवेश में इस वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने बृहस्पतिवार को पोस्टमार्टम के बाद जहीर का शव परिवार के हवाले कर दिया है। पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से पड़ताल कर रही है।
बेटे के शव देखकर बेसुध हुई मां
जहीर का शव देखकर उसके परिजनों को कुछ सूझ नहीं रहा है। मां तो बार-बार बेसुध हो रही है। जहीर अपने परिवार के साथ जनता कॉलोनी, वेलकम में रहता था। उसके परिवार में पिता गुलशेर, मां के अलावा तीन भाई हैं। जहीर मुस्तफाबाद में अपने पिता के साथ बाइक सीट कवर बनाने का काम करता था। उसकी बुआ अपने परिवार के साथ वेलकम में रहती हैं।