माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रामलीला मैदान में रैली के बाद दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए अधिसूचना कभी भी जारी की जा सकती है। इसलिए अनुमान लगाया जा रहा है कि दिल्ली से जुड़ी जो भी घोषणा केंद्र सरकार को करनी होगी, वह इस रैली के जरिए कर दी जाएगी। यही कारण है कि इस रैली के प्रति लोगों का इंतजार बढ़ता जा रहा है।
राहुल की रैली से रोचकता बढ़ी
दरअसल, केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में कांग्रेस भी 30 नवंबर को रामलीला मैदान में एक मेगा रैली आयोजित करने वाली थी। इस रैली को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी संबोधित करने वाले थे।
अब यह रैली आगामी 14 दिसंबर को होने जा रही है। इसके ठीक आठ दिन बाद प्रधानमंत्री इसी मैदान में बोलेंगे, इसलिए माना जा रहा है कि वे यहां से भी कांग्रेस के ऊपर हमला बोलने का अवसर हाथ से जाने नहीं देंगे। वहीं दोनों दलों में अपनी रैली को ज्यादा व्यापक बनाने की होड़ भी देखने को मिल सकती है।
रामलीला मैदान की रैली को सफल बनाने के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। इसके लिए कार्यकर्ताओं को अभी से उनकी जिम्मेदारी दे दी गई है। रैली में दिल्ली की हर कच्ची कालोनी से कम से कम सौ लोगों को लाने की योजना बनाई जा रही है। जिला और मंडल स्तर के कार्यकर्ताओं को इसके लिए अभी से तैयार रहने के लिए बता दिया गया है।
झारखंड चुनाव में मतदान प्रक्रिया 30 नवंबर से शुरू होकर 7 दिसंबर, 12 दिसंबर, 16 दिसंबर और 20 दिसंबर को संपन्न होगी। माना जा रहा है कि पार्टी के शीर्ष नेता अंतिम दो दिनों में ही रैली के कार्यक्रम में तेजी के साथ सक्रिय होंगे।
लगभग 40 लाख वोटर निशाने पर
दरअसल, दिल्ली की 1797 कच्ची कालोनियों में भारी संख्या में रहने वाली आबादी राजनीतिक दलों के निशाने पर है। अनुमानतः लगभग 40 लाख वोटर इन कालोनियों में सीधे तौर पर रहते हैं। लेकिन ऐसे लोगों की भी भारी संख्या है जो रहने के लिए दूसरी जगहों पर रहते हैं लेकिन इन जगहों पर छोटी-छोटी फैक्ट्रियां लगा रखी हैं। जाहिर है कि यह एक बड़ा वोट बैंक है जिसे सभी राजनीतिक दल साधना चाहते हैं।