केजरीवाल ने बताया कि दिल्ली में सरकारी व निजी जमीन पर बसीं सभी 1797 कॉलोनियां नियमित होंगी। इसके लिए कट ऑफ डेट एक जनवरी 2015 तक की गई है। इससे पहले दिल्ली की पूरी बसावट को मौजूदा प्रक्रिया के तहत नियमित किया जाएगा।
कॉलोनियों के विकास पर 6000 करोड़ खर्च कर रही है सरकार
सीएम केजरीवाल ने बताया कि अब तक कच्ची कॉलोनी में कभी कोई विकास कार्य नहीं हुआ था। केजरीवाल का दावा है कि दिल्ली में आप की सरकार बनने पर बड़े पैमाने पर कॉलोनियों में विकास का काम शुरू किया गया। सड़क, नाली, गलियों आदि के निर्माण पर करीब 3,500 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसके अलावा करीब 2,500 करोड़ रुपये से इन कॉलोनियों में पानी और सीवर की लाइन डालने का काम चल रहा है।
केंद्र सरकार की इस मसले में अपनी दलील
इस मामले में केंद्रीय आवास व शहरी कार्य मंत्रालय अधिकारियों का कहना है कि अनाधिकृत कालोनियों को नियमित करने की संभावना तलाशने के लिए चुनाव से पहले उपराज्यपाल की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई थी। कमेटी ने 90 दिन के भीतर अपनी सिफारिशें दे दी हैं। इसके आधार पर मंत्रालय इस मसले पर कैबिनेट नोट तैयार किया है। इसका एक प्रस्ताव मंजूरी के लिए दिल्ली सरकार केे भेज दिया गया है। दिल्ली से जवाब मिलने के बाद केंद्र सरकार आगे बढ़ेगी।
कच्ची कॉलोनी को लेकर दिल्ली की सियासत गरमा चुकी है। इन कॉलोनियों में रहने वालों को मालिकाना हक दिलाने का श्रेय जहां एक ओर दिल्ली सरकार ले रही है। वहीं, दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने इसका श्रेय केंद्र सरकार को दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लंबे समय से इसके लिए प्रयास कर रही थी, पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ही रोड़े लगा रहे थे। अब चूंकि चुनाव नजदीक है तो दिल्ली सरकार यूटर्न लेकर श्रेय लेने में जुटी है।
तिवारी ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार के सहयोग से कच्ची कॉलोनियों के निवासियों को मालिकाना हक दिलाने के लिए रजिस्ट्री कराना शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने चुनाव से पहले दिल्ली वालों के लिए इसे केंद्र सरकार की ओर से सबसे बड़ा तोहफा बताया।
प्रदेश कार्यालय में बृहस्पतिवार को प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान तिवारी ने बताया कि साल 2015 में अनाधिकृत कॉलोनियों को नियमित करवाने के लिए शहरी विकास मंत्रालय ने जब दिल्ली सरकार से रिपोर्ट मांगी तो सीएम केजरीवाल ने इसके लिए दो साल का समय मांगा। दो वर्ष बीत जाने के बाद मंत्रालय ने दोबारा रिपोर्ट मांगी तो फिर दो साल का समय मांग लिया। जब दिल्ली सरकार के दोहरे व्यवहार का पता चला तो मंत्रालय ने इस मसले को गंभीरता से लिया और उपराज्यपाल के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन कर दिया। कमेटी ने तीन माह में अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपी, जिसके आधार पर इन कॉलोनियों को नियमित करने का कार्य तेजी से शुरू हो गया है। तिवारी ने कहा कि अगर वाकई में मुख्यमंत्री कुछ करना चाहते हैं तो वे सभी अनाधिकृत कॉलोनियों में कम से कम बाउंड्री ही करा दें। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार में इन कॉलोनियों को थोक के भाव प्रोविजनल सर्टिफिकेट भी बांटे थे जिसका कोई वैधानिक महत्व नहीं है।