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कसी नकेल यौन शोषण का रजिस्टर होगा मेनटेन

Mon, 24 Aug 2015 09:38 PM IST
सीमा शर्मा/अमर उजाला, दिल्ली
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देशभर के विश्वविद्यालयों को अब अपनी वेबसाइट पर सेक्सुअल हरासमेंट का लिंक देना होगा। ताकि छात्रा, शिक्षिका या महिला कर्मी अपनी शिकायत सीधे कुलपति या रजिस्ट्रार तक पहुंचा सकें।
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जेएनयू व डीयू मामले पर संज्ञान लेते हुए मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) के दखल पर यूजीसी ने देशभर के विश्वविद्यालयों को निर्देश जारी किया है।

विश्वविद्यालयों से अप्रैल 2014 से मार्च 2015 तक कुल सेक्सुअल हरासमेंट की शिकायतों की रिपोर्ट सितंबर तक मांगी है। खास बात यह है कि अब कुलपति व रजिस्ट्रार को स्वयं शिकायतों संबंधी रजिस्टर भी अपडेट करना होगा।

औचक निरीक्षण करेगी यूजीसी की टीम

इसके अलावा यूजीसी ने ऐसे मामलों के लिए एक टास्क फोर्स का गठन भी किया है जो विश्वविद्यालयों में औचक निरीक्षण करेगी। देशभर के विश्वविद्यालयों के कुलपति को लेटर भेजा है।

यूजीसी के सचिव जसपाल सिंह ने लिखा है कि बार-बार नोटिस देने के बाद भी सेक्सुअल हरासमेंट पर कोई काम नहीं हो रहा है। यूनिवर्सिटी वेबसाइट पर सेक्सुअल हरासमेंट का लिंक देना होगा।

विश्वविद्यालयों में इंटरनल कंप्लेंट कमेटी का भी गठन करना पड़ेगा। इसके अलावा कुलपति व रजिस्ट्रार स्वयं एक रजिस्टर बनाएंगे, जिसमें कितनी शिकायतें पहुंचीं, उनका निवारण, समस्याओं का समाधान, जांच व मामले सुलझाए गए की जानकारी विस्तार से लिखनी होगी।
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कार्रवाही न होने पर होगा एक्शन

पांच प्रश्नों का कॉलम भरकर देना होगा
. साल भर में विवि में कुल कितनी सेक्सुअल हरासमेंट की शिकायत पहुंची?
. साल भर में कितनी शिकायतों का निपटारा हुआ?
. पिछले 90 दिनों से कितने मामले लंबित पड़े हैं?
. पिछले एक वर्ष में सेक्सुअल हरासमेंट मामले में जागरूकता के लिए कितनी वर्कशॉप आयोजित कीं?
. कितनी शिकायतों पर किस प्रकार की कार्रवाई की गई?

काम नहीं करने पर विवि व कॉलेज पर एक्शन
यूजीसी ने साफ कर दिया है कि यदि विश्वविद्यालय और कालेज निर्देश का पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

इस निर्देश के बाद विश्वविद्यालयों व कॉलेजों से मिलने वाली रिपोर्ट को एमएचआरडी समेत राज्य सरकारों को भेजा जाएगा, क्योंकि स्टेट यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई का अधिकार राज्य सरकारों के पास होता है।
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