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छेड़छाड़ करने वाले उबर कैब ड्राइवर को मिली जमानत

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पुलिस ने देर रात पीड़िता की तरफ से भेजे ईमेल के आधार पर कैब चालक विनोद के खिलाफ छेड़छाड़ (आईपीसी-354ए) के तहत मामला दर्ज कर लिया था।
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इसके बाद आरोपी की तलाश में कई जगह छापेमारी की गई। मंगलवार की सुबह विनोद को उसके घर शाहबाद मोहम्मदपुर से पकड़ लिया गया। करीब चार घंटे सेक्टर-56 थाना पुलिस ने आरोपी से पूछताछ की।

आरोपी विनोद सोनीपत जिले के खेड़ी दहिया गांव निवासी कृष्ण कुमार के नाम से रजिस्टर्ड स्विफ्ट डिजाइर को उबर कैब में दो साल से चला रहा था। पांच महीने पहले उबर कैब के एक अन्य ड्राइवर का कारनामा आने के बाद विनोद ने कैब चलानी बंद कर दी थी।
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लेकिन उबर की सर्विस शुरू होने पर वह फिर कैब चलाने लगा। आरोपी के एक बेटा और एक बेटी है। आरोपी चालक ने मीडिया को नसीहत दी कि वह पूरे मामले को ईमानदारी से दिखाए।

दोपहर करीब 2:30 बजे उसे इसके बाद उसे जेएमआईसी इराम हसन की अदलत में पेश किया गया। जहां से उसे निजी मुचलके पर जमानत दे दी गई।
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कैब से उतरते ही चालक ने की छेड़छाड़

कैब सेवा देने वाली उबर कंपनी एक बार फिर विवादों में आ गई है। एक युवती ने इसके ड्राइवर पर गुड़गांव जाते वक्त छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया है।

दिल्ली की रहने वाली 21 वर्षीय युवती सेक्टर-29 स्थित किंगडम ऑफ ड्रीम्स में कलाकार है। दो दिन पहले (शनिवार) को वह उबर कैब से दिल्ली से गुड़गांव सनसिटी में रहने वाली अपनी दोस्त से मिलने आ रही थी।

गुड़गांव में कैब से उतरने के बाद आरोपी चालक ने युवती से छेड़छाड़ की। जिसके बाद वह अपनी दोस्त से मिलकर देर रात दिल्ली लौट गई। इसके बाद उसने घटना की जानकारी अपने भाई को दी, जिसके बाद भाई ने उबर कैब प्रबंधन से शिकायत की।

चूमने और छेड़छाड़ की कोशिश की

उबर कंपनी को फोन पर की गई अपनी शिकायत में उन्होंने कहा कि विनोद (40) नामक ड्राइवर ने उसे चूमने और छेड़छाड़ की कोशिश की।

इस पर कंपनी के प्रतिनिधि ने कहा कि इस तरह की हरकतें यहां कतई बर्दाश्त नहीं की जातीं और हमारी टीम चालक की खैर खबर ली रही है।

हालांकि महिला ने भाई ने आरोप लगाया कि शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने चालक को सजा देने की मांग की है। युवक ने कंपनी को बताया कि उन्होंने मामले की शिकायत गुड़गांव पुलिस से की है।

इस सिलसिले में उबर की ओर से कहा गया, ‘घटना की जानकारी मिलने के तुरंत बाद हमारी टीम ने पीड़ित से बातचीत की। वहीं टीम के कई सदस्यों ने ड्राइवर से भी घटना की पूरी जानकारी ली। ड्राइवर के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की गई।'

उबर सीधे देखेगी इस मामले को

उबर ने कहा कि इस मामले में जुड़े पक्षों की निजता को बचाए रखने के लिए उबर इस मामले को सीधा खुद देखेगी। उबर का कहना है कि ड्राइवर विनोद के बाद कार्मिशियल लाइसेंस और पीएसवी बैज है जो कि दिल्ली परिवहन विभाग की ओर से जारी किया गया है।

इस सिलसिले में दिल्ली पुलिस ने कहा कि उन्हें कोई शिकायत नहीं मिली है। यह खबर सोशल मीडिया पर भी फैल गई है। पिछले साल दिसंबर में उबर के एक चालक द्वारा रेप करने की घटना के बाद से इस कंपनी पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

आरोपी ड्राइवर के खिलाफ छेड़छाड़ (354-ए) का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस को इस सिलसिले में एक ईमेल मिला था। कंपनी से पूरी जानकारी मांगी गई है। -नवदीप सिंह विर्क, पुलिस आयुक्त, गुड़गांव

राजधानी में बिना जीपीएस टैक्सी का फिटनेस नहीं

राजधानी में चलने वाले हर सार्वजनिक वाहन में जीपीएस अनिवार्य हो गया है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने यहां बताया, ‘इन वाहनों में डीटीसी की बसें, ऑटो रिक्शा, टैक्सी और कांट्रैक्ट कैरिज के तहत चलने वाले वाहन शामिल हैं।

हम नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए टीमें तैनात करेंगे।’ जीपीएस न होने के चलते सोमवार को ही सैकड़ों ऑटो और टैक्सियों को फिटनेस प्रमाण पत्र देने से इनकार कर दिया गया।

राजधानी की सड़कों पर बिना ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम (जीपीएस) के दौड़ रही टैक्सियों का फिटनेस बंद होगा। दिल्ली परिवहन विभाग ने टैक्सी पर नकेल कसने के लिए यह आदेश जारी कर दिया है।

परिवहन विभाग ने टैक्सी चालकों को 31 मई तक जीपीएस लगवाने का समय दिया था। परिवहन विभाग के इस आदेश के बाद टैक्सी यूनियन ने विरोध शुरू कर दिया है। यही नहीं उन्होंने हड़ताल पर जाने की चेतावनी भी दी है।
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31 मई थी अंतिम सीमा

दरअसल, बीते साल दिसंबर में उबर रेप केस मामले के बाद दिल्ली परिवहन विभाग ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट की टैक्सी को छोड़कर सभी तरह की टैक्सी (रेडिया टैक्सी, काली पीली टैक्सी व अन्य) में जीपीएस लगाने का आदेश जारी किया था।

इस बार परिवहन विभाग ने सख्त आदेश देते हुए पहली बार कहा कि 31 मई तक जीपीएस नहीं लगवाने वाली टैक्सी का फिटनेस रोक दिया है। बताते चलें कि टैक्सियों को प्रत्येक छह माह पर एक बार फिटनेस सर्टिफिकेट परिवहन विभाग से लेना होगा।

उधर, टैक्सी यूनियन के लोग जीपीएस का विरोध कर रहे हैं। उनके मुताबिक वह जीपीएस से नहीं उसके खर्च को लेकर विरोध जता रहे है। उनका कहना है कि यह खर्च सरकार उठवाएं।

इसे लेकर टैक्सी यूनियन नेताओं ने बीते परिवहन विभाग के अधिकारियों से मुलाकात भी की। टैक्सी यूनियन के नेता किशन वर्मा ने कहा कि अगर सरकार नहीं मानी तो वह हड़ताल पर जाएंगे।
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