मां के मना करने के बाद भी नहीं माना विशाल
विशाल की मां रश्मि का रोते-रोते बुरा हाल है। इकलौती संतान की मौत के बाद वह रोते-रोते बार-बार बेहोश हुए जा रही थीं। उत्तम नगर में रहने वाले विशाल के चाचा नंद कुमार राणा ने बताया कि उनकी भाभी के पास अब खोने को कुछ नहीं है। दो साल पहले बीमारी की वजह से विशाल के पिता राम मनोहर राणा की मौत हो गई थी। परिवार में बस विशाल और उसकी मां बची थी। पिता की मौत के बाद विशाल ने घर का खर्चा चलाने के लिए जोमैटो में डिलीवरी बॉय की नौकरी शुरू कर दी थी। मंगलवार देर रात को वह घर पहुंचा तो घर पर दाल बनी हुई थी। वह मां से बाहर जाकर चिकन खाकर आने की बात करने लगा। मां मंगलवार होने का हवाला देकर मना किया। घर पर ताला भी लगा दिया। लेकिन 12 बजे अगला दिन लगने की बात कर वह अपनी बाइक पर घर से निकल गया। ऋतिक और तरुण भी उसके घर आ गए। तीनों विशाल की बाइक पर सीलमपुर के लिए निकले और हादसे का शिकार हो गए। एक परिजन ने बताया कि चार माह पूर्व ही विशाल ने किस्तों पर डिलीवरी के लिए बाइक खरीदी थी।
हेलमेट होता तो बच सकती थी जान
मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारी ने बताया कि हादसे में बाइक से गिरने के बाद तीनों ही दोस्तों के सिर में गंभीर चोट लगी है। जानकारों का कहना है कि यदि तीनों के पास हेलमेट होता तो शायद कम चोट लगती और जान बचने की संभावना बढ़ जाती। मामले की जांच कर रहे दिल्ली पुलिस के अधिकारी ने बताया कि 80 फीसदी से ज्यादा सड़क हादसों में दोपहिया वाहन चालकों की मौत सिर में गंभीर चोट लगने की वजह से होती है। बाइक से गिरने के बाद दोपहिया वाहन चालकों के सिर में चोट लगती है जो उनके लिए जानलेवा साबित होती है। अधिकारी ने लोगों से अपील की है कि दोपहिया वाहन चालक बिना हेलमेट के अपना वाहन न चलाएं। हेलमेट भी आईएसआई मार्क का होना चाहिए।