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Delhi NCR News: दो साल की बहन ने भाई को दी नई जिंदगी, स्टेम सेल देकर बचाई जान

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-रक्षाबंधन पर सामने आई भाई-बहन के अनोखे रिश्ते की कहानी
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। रक्षाबंधन भाई-बहन के प्यार और एक-दूसरे की रक्षा के वादे का त्योहार है। इस बार एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसमें छोटी बहन ने अपने भाई की जान बचाकर इस रिश्ते को नया अर्थ दिया है। थैलेसीमिया से पीड़ित सोम यादव को उसकी महज दो साल की बहन खुशी ने ब्लड स्टेम सेल दान कर नई जिंदगी दी है। सोम को सिर्फ पांच महीने की उम्र में थैलेसीमिया मेजर होने का पता चला था। बाद में उसकी बहन सौम्या भी इस बीमारी से पीड़ित हो गई। परिवार में दोनों बच्चों के लिए सही डोनर नहीं मिलने के कारण उन्हें बार-बार खून चढ़ाना पड़ता था। गांव में रहने वाले आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए हर महीने खून और दवाइयों का इंतजाम करना काफी मुश्किल था।
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इसी दौरान साल 2021 में खुशी का जन्म हुआ। दो निजी फाउंडेशन की ओर से लगाए गए एक कैंप में परिवार को मुफ्त एचएलए टाइपिंग की सुविधा मिली। जांच में पता चला कि खुशी अपने भाई सोम के लिए 12/12 एचएलए मैच है। यानी वह सोम के लिए बिल्कुल सही स्टेम सेल डोनर बन सकती थी। ऐसे में सिर्फ दो साल की खुशी ने अपने भाई सोम को ब्लड स्टेम सेल दान किए। ट्रांसप्लांट के बाद सोम की सेहत में सुधार हुआ और आज वह स्वस्थ जीवन जी रहा है। वह दूसरे बच्चों की तरह स्कूल जाता है और सामान्य जिंदगी जी रहा है। फाउंडेशन के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन पैट्रिक पॉल ने कहा कि सोम और खुशी की कहानी रक्षाबंधन के रिश्ते को एक नया अर्थ देती है। उन्होंने बताया कि हर मरीज को परिवार में मैचिंग डोनर नहीं मिल पाता। भारत में सही उम्र के लोगों में से केवल करीब 0.09 प्रतिशत लोग ही ब्लड स्टेम सेल डोनर के रूप में पंजीकृत हैं।
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