गलवार को साइबर सिटी ने भूकंप के दो झटके महसूस किए। मौसम विभाग के मुताबिक पहला झटका 12 बजकर 36 मिनट के करीब आया। इसकी त्रीवता करीब 4.2 रिएक्टर स्केल पर नापी गई। एक मिनट 25 सेकेंड तक धरती कांपती रही। नेपाल से आए भूकंप की तरंगों की वजह से यह झटके महसूस किए गए।
भूकंप के झटकों के साथ ही अफरा तफरी का माहौल हो गया। लोग अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे। आधे घंटे बाद 01 बजकर 10 मिनट पर भी भूकंप के झटके महसूस किए गए, लेकिन इसकी त्रीवता बहुत कम थी।
झटके का एहसास होते ही लोग दफ्तर, घर और दुकान से बाहर निकलने लगे। आनन फानन में शहर के मॉल और ऊंची इमारतों को खाली कराया गया। लोग सड़कों पर इकट्टा हो गए। लोगों के आंखों के सामने नेपाल की ताबाही का मंजर घूमने लगा। जिला प्रशासन के मुताबिक मंगलवार शाम तक भूकंप से किसी प्रकार का नुकसान शहर में नहीं हुए है।
भूकंप से इमारतें हिलने लगी। पंखे हिलने लगे, कुर्सी पर बैठे लोगों को झटके लगे। भूकंप के झटके के साथ ही ऊंची इमारतों में रेड सिगभनल चालू कर दिया। लोगों से अलार्म से सचेत करते हुए तुरंत बाहर निकलने को कहा गया। लोग आनन फानन में जिस हालत में थे, वो निकल आए।
इस झटके से बहुमंजिला इमारतों के लोगों की सांसे फूल गई। साथ ही लोगों को अपनी सुरक्षा सताने लगी थी। एक दूसरे का हालचाल पूछने के लिए मोबाइल फोन घनघनाने लगे।
हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के आपदा प्रबंधन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अभय श्रीवास्तव कहते है कि भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण ने एनसीआर को भूकंप के जोन चार में रखा है। यहां कभी भी भूकंप आ सकता है।
मजबूती को दरकिनार कर बनाई जा रही यहां की इमारतें इससे तेज भूकंप के झटके शायद ही सहन पाए। गुड़गांव में अरावली पहाड़ी के साथ बनी इमारतें और बसा सोहना शहर को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है।