दिल्ली में डीटीसी ड्राइवरों की हड़ताल का असर पूरे दिल्ली-एनसीआर में रहा। डीटीसी बसों की हड़ताल के कारण टीएचए और गाजियाबाद से दिल्ली आने-जाने वाले यात्रियों की हालत खस्ता हो गई।
जहां बसों के इंतजार में यूपी-बॉर्डर पर यात्रियों की भीड़ लगी रही। उधर, दिल्ली समेत एनसीआर में साढ़े पांच सौ रूट पर करीब 6900 (4700 डीटीसी व 2200 क्लस्टर) बसों का चक्का जाम होने से लाखों यात्री बस न मिलने से भटकते रहे। ऐसे में निजी वाहन चालकों ने खूब चांदी काटी।
डीटीसी बस चालक की दिल्ली में पीट-पीट कर की गई हत्या के कारण डीटीसी के ड्राइवरों की हड़ताल से यात्रियों को तकलीफें झेलनी पड़ीं। वहीं दिल्ली में हुई घटना पर यूपी रोडवेज के ड्राइवरों में भी रोष रहा।
गौरतलब है कि यूपी से दिल्ली जाने के लिए लोग मेट्रो के अलावा डीटीसी बसों का सहारा लेते हैं। वहीं टीएचए से दिल्ली जाने के लिए यात्री यूपी गेट, आनंद विहार, भोपुरा बॉर्डर, ज्ञानी बॉर्डर से बसें लेते हैं।
हालांकि यात्रियों की समस्या को देखते हुए रोडवेज की ओर से दिल्ली के लिए कौशांबी डिपो से आनंद विहार होते हुए अतिरिक्त बसें लगाई।
आरएम पीके बोस ने बताया कि यात्रियों को राहत देने के लिए दिल्ली के लिए परमिट प्राप्त 22 बसों को भी दिल्ली के रूटों पर लगा दिया।
ड्राइवर-परिचालकों ने रखा मौन
डीटीसी ड्राइवर की हत्या पर यूपी रोडवेज के ड्राइवरों और परिचालकों ने कौशांबी डिपों में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी।
ड्राइवरों ने कहा कि वे सवारियों के लिए दिन रात चलते हैं। लेकिन ऐसी घटनाएं हतोत्साहित करती हैं और डर पैदा करती हैं।
मेट्रो में रही भारी भीड़
हड़ताल का असर मेट्रो में सबसे ज्यादा दिखाई दिया। बसों के बंद रहने से सुबह से मेट्रो में भीड़ रही। जहां दोपहर में मेट्रो लगभग खाली रहती थी वहीं सोमवार को फुल नजर आई। इस दौरान वैशाली और कौशांबी स्टेशन पर कई बार टोकन लेने के लिए लोगों को जद्दोजहद करनी पड़ी।
निजी वाहन चालकों की चांदी
डीटीसी बसों के ड्राइवरों की हड़ताल से निजी वाहन चालकों ने खूब मुनाफा कमाया। यूपी दिल्ली बॉर्डर पर निजी बसों के अलावा, ऑटो, टेंपो, मिनी बसें बड़ी संख्या में चलीं। ऐसे में डीटीसी बसों के अभाव में यात्रियों को निजी वाहनों से ही राहत मिली।