फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गाजियाबाद के बखरवा गांव में मिले दो हजार साल पुराने मिट्टी के बर्तन, औजार

Thu, 10 Jan 2019 04:56 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजियाबाद
विज्ञापन
2 हजार साल पुराने बर्तन और औजार - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

गाजियाबाद के बखरवा गांव में तालाब की खुदाई के दौरान दो हजार साल पुराने खिलौने, मिट्टी के बर्तन और औजारों के अवशेष मिले हैं। शुरुआती जांच में यह अवशेष कुषाण काल, गुप्त काल और हड़प्पा काल के बताए जा रहे हैं। अवशेष मिलने के बाद अब यह गांव और तालाब इतिहासकारों के लिए खोज का विषय बन गया है। 

विज्ञापन


कोतवाली क्षेत्र के बखरवा गांव में तालाब का चौड़ीकरण के लिए मिट्टी उठाई जा रही थी। इस दौरान ऐतिहासिक वस्तुओं मे रुचि रखने वाले छात्र सचिन गोस्वामी की नजर मिट्टी के कुछ खास बर्तनों के अवशेषों पर पड़ी। सचिन ने इसकी जानकारी मोदी डिग्री कॉलेज के इतिहास विभाग के प्रोफेसर और इतिहासकार डॉ. केके शर्मा को दी। शर्मा ने मौके पर पहुंचकर खोजबीन की। 

दो हजार साल पुराना है यह गांव
इतिहासकार डॉ. केके शर्मा के मुताबिक, मिले पुरातन अवशेष पहली शताब्दी से लेकर 15वीं शताब्दी तक के बीच के हैं। इस पीरियड में कुषाण, गुप्त और हड़प्पा काल आता है। अवशेषों से यह साबित होता है कि बखरवा में मानव सभ्यता का इतिहास करीब दो हजार साल पुराना है।
विज्ञापन


ये मिले अवशेष
बखरवा गांव से खुदाई के दौरान मिट्टी की टेराकोटा की बॉल, घट आकार का मनका, मृदभांड के टुकड़े, गुप्त कालीन खिलौनानुमा रथ के पहिये का टुकड़ा, दीपक के ऊपर ढकने का फानूसनुमा टुकड़ा, लोहे के औजारों के अवशेष और कुछ बर्तनों के टुकड़े मिले हैं।  

मिल चुके हैं महाभारत कालीन अवशेष भी
मोदीनगर के देहात क्षेत्र का महाभारत काल से संबंध रहा है और इसके ऐतिहासिक साक्ष्य मिल चुके हैं। 2013 में निवाड़ी थाना क्षेत्र के भनैड़ा गांव में महाभारत कालीन मिट्टी के बर्तनों के अवशेष मिले थे। 2013 में ही सुठारी गांव में हड़प्पा सभ्यता के अवशेष पाए गए थे। इसके अलावा 2010 में अबूपुर गांव में कुषाण काल के अवशेष मिले थे। आसपास के क्षेत्र में मानव सभ्यता का इतिहास काफी पुराना है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें