गुड़गांव में नहाने गए दो छात्रों की धनकोट नहर में डूबने से मौत हो गई। फायर ब्रिगेड और पुलिस ने करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद दोनों के शवों को बाहर निकाला। घटना के बाद मृतकों के घरों में मातम पसरा हुआ है।
शिवाजी नगर और ओमनगर में रहने वाले पांच छात्र सोमवार सुबह आठ बजे धनकोट नहर में नहाने के लिए गए। इनमें दो नहर में उतर गए, जबकि तीन बाहर बैठे रहे। पानी में उतरे छात्र थोड़ी देर बाद अचानक डूबने लगे।
नहर के बाहर बैठे बच्चों ने मदद के लिए शोर मचाया। स्थानीय लोगों ने नहर में उतरकर बच्चों को खोजने का प्रयास किया। इसके बाद पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी गई। राजेंद्रा पार्क थाना पुलिस के अलावा फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची।
करीब एक घंटे तक कड़ी मशक्कत के बाद दोनों के शवों को बाहर निकाला गया। मृतकों की पहचान शिवाजी नगर निवासी हिमांशु (15) पुत्र राजकुमार और विष्णु (14) पुत्र ताराचंद के रुप में हुई। उधर, घटना की सूचना मिलते ही मृतकों के घर में मातम पसर गया। सब इंस्पेक्टर सतबीर के अनुसार, दोनों के पोस्टमार्टम के बाद दोनों शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं।
जाना था स्टेडियम, पहुंच गए नहर
मरने वाले को यह नहीं पता होता है कि वह कब और कैसे मौत के आगोश में समा जाए। धनवापुर नहर में नहाने के लिए गए बच्चों को भी शायद यह अंदेशा नहीं था कि वहां इतना बड़ा हादसा हो जाएगा। वो तो ताऊ देवीलाल स्टेडियम जाने के लिए अपने-अपने घरों से निकले थे।
लेकिन, होनी को कुछ और ही मंजूर था। हादसे का शिकार हुए विष्णु ने अपने दोस्तों से धनवापुर नहर में नहाने के कई किस्से सुने थे। उसने ही अपने दोस्तों को वहां जाने के लिए राजी भी किया। तीन साइकिलों पर सवार होकर वे स्टेडियम की जगह नहर पर नहाने पहुंच गए। विष्णु को क्या पता था कि उसे उसकी मौत यहां खींच लाई है।
दोस्तों के अनुसार, विष्णु ने कहा था कि गर्मी में नहर में नहाने में काफी मजा आएगा। इसके बाद पांचों धनवापुर नहर गए। सबसे पहले विष्णु और हिमांशु ने नहर में छलांग लगाई। बाकी तीनों दोस्त भी नहर में छलांग लगाने की तैयारी कर रहे थे। बताया जा रहा है कि पांचों में किसी को भी ज्यादा तैरना नहीं आता था। जैसे ही विष्णु और हिमांशु डूबते दिखे किसी की भी उन्हें बचाने की हिम्मत नहीं हो सकी।
परिजन हैरान
घटना के बाद मृतकों के परिजन भी हैरान थे कि ये सभी आखिर धनवापुर नहर कैस पहुंच गए? जबकि, सभी दोस्त हर सुबह स्टेडियम में खेलने के लिए जाते हैं। रोजाना की भांति वह सुबह स्टेडियम जाने की बात कहकर ही घर से निकले थे।