पार्कों की सिंचाई और झीलों में जलभराव के लिए होगा इस्तेमाल, 10 साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी
संदीप वर्मा
नई दिल्ली। राजधानी में सीवर के गंदे पानी को शोधित कर हरियाली की सिंचाई, बागवानी और झीलों में पानी की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है। इसके तहत आरके पुरम विधानसभा क्षेत्र में दो विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (डीएसटीपी) स्थापित किए जाएंगे। इनकी संयुक्त क्षमता प्रतिदिन पांच लाख लीटर सीवेज का शोधन करने की होगी। इससे पार्कों और अन्य हरित क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पेयजल की खपत कम करने और जल संसाधनों पर दबाव घटाने में मदद मिलेगी।
दिल्ली जल बोर्ड की योजना के अनुसार, बाबा गंगनाथ मंदिर के पास पार्क और हिल व्यू सीवेज पंपिंग स्टेशन (एसपीएस) में 250-250 किलोलीटर प्रतिदिन (केएलडी) क्षमता के संयंत्र लगाए जाएंगे। बाबा गंगनाथ मंदिर के पास स्थापित होने वाले संयंत्र में आधुनिक मूविंग बेड बायोफिल्म रिएक्टर (एमबीबीआर) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें पीएलसी-स्काडा ऑटोमेशन, इंटरनेट आधारित निगरानी और ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम की व्यवस्था होगी। इससे संयंत्र के संचालन और शोधित पानी की गुणवत्ता पर नजर रखने में मदद मिलेगी।
वहीं, हिल व्यू एसपीएस में घरेलू सीवेज के शोधन के लिए कॉम्पैक्ट और मॉड्यूलर संयंत्र स्थापित किया जाएगा। इसमें प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक शोधन के साथ पराबैंगनी (यूवी) कीटाणुशोधन प्रणाली भी लगाई जाएगी। इससे पानी को निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप शोधित करने में मदद मिलेगी।
10 साल तक करना होगा रखरखाव
दोनों संयंत्रों के निर्माण, उपकरणों की आपूर्ति, स्थापना, परीक्षण और सफल संचालन की जिम्मेदारी ठेकेदार की होगी। इसके अलावा, संयंत्र शुरू होने के बाद 10 वर्ष तक संचालन और रखरखाव भी करना होगा। इसमें मशीनों की मरम्मत, टैंकों की सफाई, गाद और कचरे का निपटान, उपकरणों की देखभाल तथा ऑनलाइन निगरानी प्रणाली का रखरखाव शामिल है।
पेयजल की खपत घटाने में मिलेगी मदद
शोधित पानी का उपयोग पार्कों की सिंचाई, बागवानी, लैंडस्केपिंग और झीलों में पानी की भरपाई के लिए किया जा सकेगा। इससे इन कार्यों के लिए साफ पानी पर निर्भरता कम होगी। हालांकि, योजना का वास्तविक लाभ संयंत्रों के समय पर निर्माण, नियमित संचालन, पानी की गुणवत्ता की निगरानी और शोधित पानी की प्रभावी आपूर्ति व्यवस्था पर निर्भर करेगा।