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यादगार ...सरयू पुल पर बगल ने निकली गोली तो अटक गई थी सांस 

Thu, 06 Aug 2020 06:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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धर्मवीर शर्मा - फोटो : अमर उजाला
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वाकई, राममंदिर के निर्माण को साकार होते देखना मेरे लिए स्वार्गिक अनुभूति है। कारसेवकों की मेहनत रंग लाई और अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर का भूमि पूजन संपन्न हुआ। टीवी पर अयोध्या की तस्वीरें कई बार भावुक कर गईं। वह सपना, जिसे लेकर हम लोगों ने 1990 में दिल्ली से अयोध्या तक की यात्रा की थी, वह आज जाकर पूरी हुई।

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फिलहाल लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय महामंत्री धर्मवीर शर्मा शिलापूजन पर सवाल करते ही रौ में बह चले। आज से करीब तीन दशक पहले मंदिर बनाने की दिल्ली से करीब सौ कारसेवकों की जत्थे में वह शामिल थे। दिसंबर 1990 में पुरानी दिल्ली की गलियों से यह जत्था अल सुबह रवाना हुआ था। उस वक्त को याद करते हुए धर्मवीर शर्मा बताते हैं कि राम मंदिर निर्माण को लेकर पूरे देश में उबाल था। हर किसी के मन में मंदिर बनाने की दृढ़ इच्छा थी। जगह-जगह कार सेवकों को हिरासत में लिया जा रहा था। इससे ज्यादातर लोगों को तो रास्ते में ही पुलिस पकड़ ले गई, लेकिन छिपते-छिपाते पंद्रह लोग अयोध्या पहुंचने कामयाब रहे।

लेकिन अयोध्या पहुंचना बहुत सुखद नहीं रहा। धर्मवीर शर्मा के मुताबिक, जैसे ही सरयू नदी के पुल के पास पहुंचे, पुलिस ने ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरू कर दी थीं। बंदूक से निकली एक गोली बिलकुल पास से गुजर गई। एक बारी लगा कि जान बचनी मुश्किल है। लेकिन भगवान राम की कृपा रही कि किसी तरह बच सका और आज रामलला को विराजमान होते देखने का सौभाग्य मिला है। 
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धर्मवीर शर्मा ने बताया कि डर के आगे राम की महिमा ही थी कि मंदिर बनाने की प्रेरण ने कदम नहीं रोकने दिया। यात्रा कठिन थी, लेकिन जनमानस का सहयोग इतना था कि जहां भी कारसेवक ठिकाना बनाते थे, वहां गांव के लोगों का भरपूर सहयोग रहता था। एक गांव से दूसरे गांव पहुंचाने की भी जिम्मेदारी गांव वालों की ही होती थी। प्रशासन की नजर से बचाते हुए गांव वाले मदद को तत्पर रहते थे।

धर्मवीर शर्मा का कहना है कि 1990 में 30 साल की तब उम्र थी। मन में यही इच्छा थी कि कैसे अयोध्या पहुंच जाए। बचते हुए सरयू तक पहुंचने में कामयाब हो पाए थे। अब इच्छा पूरी हुई। हमारे देखे गए सपने साकार हुए। कोरोना काल में फिर से अयोध्या नहीं पहुंच पाने का अफसोस जताते हुए शर्मा का कहना है कि जब तक प्रभू राम नहीं चाहेंगे तब तक दर्शन मुश्किल है।

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रातभर पैदल चलकर पहुंच थे राष्ट्र प्रकाश 

राष्ट्र प्रकाश - फोटो : अमर उजाला
विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री राष्ट्र प्रकाश कारसेवा और आज के शिलान्यास से जुड़े सवाल पर कहते हैं कि जहां कहीं अयोध्या के मार्ग में हम लोग जाते थे लोगों के मन में यह रहता था कि भगवान राम के साथी आ रहे हैं। दिल्ली से अयोध्या के लिए कूच करने वालों में शामिल कारसेवक राष्ट्र प्रकाश की यादों पर आज भी उस यात्रा की यादें ताजा हैं। 

राष्ट्र प्रकाश ने बताया कि अक्तूबर 1990 में दिल्ली से रवाना हुए थे। इटावा स्टेशन पर गहन चेकिंग हो रही थी। लेकिन यात्रियों के बीच बच गए। लखनऊ स्टेशन जैसे ही कारसेवक पहुंचे, वहां पहले से इंतजार कर रहे लोगों ने इशारा कर दिया कि इस स्टेशन पर नहीं उतरना है। जब ट्रेन आगे बढ़ी तो सुनियोजित तरीके से ट्रेन की चेन पुलिंग की गई। वहां से हम लोगों ने ट्रेन छोड़ दी।

इसके बाद अयोध्या तक कारसेवक जंगल, झाड़ी, रेलवे ट्रैक के किनारे ठंड के मौसम में रात के दौरान चलते रहे। सबका यह प्रयास रहता कि पहचान में आने के बाद एक कारसेवक दूसरे कारसेवक की पहचान उजागर न करे। इससे प्रशासन को पूर ग्रुप की भनक तक नहीं लगती।

रात के वक्त जहां कारसेवक ठहरते थे और उस घर में पुलिस दस्तक दे देती थी तो महिलाएं निकलकर बताती थी कि घरों में गैर मर्दो को क्यों ठिकाना देंगे, फिर उन्हें पीछे के रास्ते से निकाल दिया जाता था। आज शिलान्यास होते देखकर जो आनंद की अनुभूति हो रही है, उसे बयान कर पाना संभव नहीं है। लग रहा है जैसे सालों का इंतजार पूरा हो गया है। 
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