विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री राष्ट्र प्रकाश कारसेवा और आज के शिलान्यास से जुड़े सवाल पर कहते हैं कि जहां कहीं अयोध्या के मार्ग में हम लोग जाते थे लोगों के मन में यह रहता था कि भगवान राम के साथी आ रहे हैं। दिल्ली से अयोध्या के लिए कूच करने वालों में शामिल कारसेवक राष्ट्र प्रकाश की यादों पर आज भी उस यात्रा की यादें ताजा हैं।
राष्ट्र प्रकाश ने बताया कि अक्तूबर 1990 में दिल्ली से रवाना हुए थे। इटावा स्टेशन पर गहन चेकिंग हो रही थी। लेकिन यात्रियों के बीच बच गए। लखनऊ स्टेशन जैसे ही कारसेवक पहुंचे, वहां पहले से इंतजार कर रहे लोगों ने इशारा कर दिया कि इस स्टेशन पर नहीं उतरना है। जब ट्रेन आगे बढ़ी तो सुनियोजित तरीके से ट्रेन की चेन पुलिंग की गई। वहां से हम लोगों ने ट्रेन छोड़ दी।
इसके बाद अयोध्या तक कारसेवक जंगल, झाड़ी, रेलवे ट्रैक के किनारे ठंड के मौसम में रात के दौरान चलते रहे। सबका यह प्रयास रहता कि पहचान में आने के बाद एक कारसेवक दूसरे कारसेवक की पहचान उजागर न करे। इससे प्रशासन को पूर ग्रुप की भनक तक नहीं लगती।
रात के वक्त जहां कारसेवक ठहरते थे और उस घर में पुलिस दस्तक दे देती थी तो महिलाएं निकलकर बताती थी कि घरों में गैर मर्दो को क्यों ठिकाना देंगे, फिर उन्हें पीछे के रास्ते से निकाल दिया जाता था। आज शिलान्यास होते देखकर जो आनंद की अनुभूति हो रही है, उसे बयान कर पाना संभव नहीं है। लग रहा है जैसे सालों का इंतजार पूरा हो गया है।