अदालत ने 9 लोगों को फर्जी पहचान देकर सरकारी खर्च पर जर्मनी भेजने के मामले में दो लोगों को दोषी करार दिया है। इन्होंने भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के नाम पर 2005 में कलाकारों की फर्जी पहचान पर 9 लोगों को जर्मनी भिजवाया था।
राउज एवेन्यू अदालत के विशेष न्यायाधीश इंदरजीत सिंह ने दोषी शिव कुमार शर्मा और बलविंदर बाबा को दोषी ठहराते हुए सजा पर बहस के लिए 22 अक्तूबर की तारीख तय की है। इनके खिलाफ सीबीआई ने आरोप पत्र दाखिल किया था।
अदालत ने गौर किया कि इस अपराध से विभिन्न मदों में सरकार को 6.79 लाख रुपये का नुकसान हुआ। अदालत ने दोनों को आपराधिक साजिश, ठगी, फर्जीवाड़ा, फर्जी दस्तावेज एवं इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में हेराफेरी के लिए दोषी ठहराया है।
अदालत ने आईसीसीआर के पूर्व महानिदेशक राकेश कुमार को बरी कर दिया था और कहा कि उन पर मुकदमा चलाने के लिए मंजूरी आदेश वैध नहीं है। एक अन्य आरोपी हरगुलाब सिंह को 26 फरवरी 2011 को माफी दे दी गई थी, क्योंकि वह सरकारी गवाह बन गया। चौथे आरोपी गुरभेज सिंह को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था।
सीबीआई के मुताबिक, भारतीय सांस्कृति संबंध परिषद् (आईसीसीआर) ने 2005 में 15 लोगों को भंगड़ा समूह ‘महक पंजाब दी’ के तहत जर्मनी की राजधानी बर्लिन भेजा था।
उन्होंने फर्जी फोटो, गलत वीसीडी, एलबम, खबरों, कई धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों से कथित तौर पर प्राप्त प्रशस्ति पत्र के माध्यम से खुद को पंजीकृत कराया था। इनमें से कुछ लोग लौट आए, लेकिन वे नौ लोग जर्मनी में ही रुक गए, जो कलाकार नहीं थे।