चिड़ियाघर प्रबंधन के अनुसार, बाघिन अदिति ने जिन्हें दूध पिलाया था, वह लंबे समय से दूध नहीं पी रहे थे, जिसके चलते 20 अगस्त की रात से 21 अगस्त की सुबह तक उन्हें चरणबद्ध तरीके से दूध छुड़ाया गया और हाथों से पालन-पोषण और उपचार के लिए अस्पताल लाया गया। इनमें से दो शावकों की तड़के उपचार के दौरान मौत हो गई और एक की हालत नाजुक है, लेकिन उसका गहन उपचार किया जा रहा है।
चिड़ियाघर के निदेशक डॉ. संजीत कुमार ने बताया कि शावकों के शवों को पोस्टमार्टम और विस्तृत जांच के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) भेज दिया गया है। शावक की अलग से देखभाल की जा रही है और वह स्वस्थ है और ठीक से दूध पी रहा है।
प्रबंधन शावक की जान बचाने के लिए आईवीआरआई और अन्य विशेषज्ञों से सलाह ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल में भर्ती करते वक्त तीनों बताई गई शावकों की हालत काफी नाजुक थी। प्राथमिक जांच में उन्हें इंफेक्शन से पीड़ित पाया गया था।
तीनों शावकों में तेज बुखार और नाक से पानी बहने की शिकायत बनी हुई थी। इन शावकों का विभिन्न टेस्ट करके इलाज चल रहा था। तीनों शावकों ने अपनी मां का दूध पीना भी 24 घंटे पहले बंद कर दिया था। अस्पताल में बिल्ली का कृत्रिम दूध पिलाने की कोशिश भी कामयाब नहीं हो रही थी। अस्पताल में भर्ती होने के करीब 25 घंटे बाद 2 शावकों की मौत हो गई है।