स्वर्ण जयंतीपुरम के 139 प्लाट आवंटन घोटाला प्रकरण में दो आईएएस जीडीए के पूर्व वीसी डीपी सिंह और पूर्व ओएसडी (वर्तमान में हमीरपुर के डीएम) आरपी पांडेय समेत कुल 5 अफसरों व चार बाबुओं की संलिप्तता सामने आई है।
आरोपियों में से 4 अब रिटायर हो चुके हैं, जबकि दो की मृत्यु हो चुकी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती के बाद शुरू की गई इस जांच के बाद दो बाबुओं को निलंबित कर दिया गया है। खास बात यह है कि इनमें से एक बाबू पहले से ही निलंबित चल रहा है।
इस बाबू पर आरोप है कि सपा सरकार बदलते ही उसने जीडीए की कई महत्वपूर्ण फाइलों को फेंक दिया था। जीडीए सचिव रविंद्र गोडबोले ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि जांच में पता चला है कि प्लाट बहाली के नाम पर नियमों को पूरी तरह से ताक पर रख दिया गया।
रामचरित्र और दीपक तलवार नामक क्लर्क ने भ्रामक आख्या देकर इस घोटाले को अंजाम दिया। पूरे प्रकरण में तत्कालीन मुख्य लिपिक उदय सिंह, जगदीश शर्मा, अनु सचिव अनिल राणा, तत्कालीन ओएसडी हीरालाल, आरपी पांडेय, तत्कालीन सचिव आरसी मिश्रा और तत्कालीन वीसी डीपी सिंह की भूमिका भी संदिग्ध मानी गई है।