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दोस्ती की ये कहानी पढ़कर रो पड़ेंगे आप

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उसे तैरना नहीं आता था। उसका दोस्त पानी की तेज लहरों में उसे थामे था.. बचाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन, वह दीपक था उन सात दोस्तों में सबसे समझदार जो मौज-मस्ती के लिए ऋषिकेश के सफर पर निकले पर एक मोड़ पर मौत से मुलाकात हो गई।
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दीपक को मालूम था कि उसका दोस्त शुभ उसे बचाने के दौरान खुद भी डूब सकता था। उसने आखिरी बार शब्द कहे : तू निकल, मैं खुद को संभाल लूंगा और शुभ को किनारे की तरफ धक्का दे दिया।

तेज लहरों में दो-तीन बार दीपक दिखाई दिया और उसके बाद चला गया। लेकिन, बुझते-बुझते भी दीपक एक जिंदगी रोशन कर गया।

हाल ही में हुई थी शादी

शनिवार को ऋषिकेश में डूबे चार दोस्तों में से एक दीपक की पत्नी आरती ने फोन पर ये बात बताई। 18 जनवरी को ही आरती और दीपक का विवाह हुआ था। आरती लखनऊ में समाचार पत्र संपादक हैं।

वो बताती हैं कि टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर दिल्ली में आईटी हेड के रूप में काम करने वाले दीपक द्विवेदी (32) सैर पर निकले सातों दोस्तों में सबसे ज्यादा समझदार थे।

उन्होंने कहा ऋषिकेश के शिवपुरी में पानी में कई लोगों को नहाता देख दीपक और उनके दोस्त रुक गए। उनका भी मन नहाने का हुआ।

'पति का चेहरा जेहन में घूमता है'

दीपक, शुभ, अभिषेक और सिद्दीकी नहाने के लिए पानी में उतर गए। तब ज्यादा पानी नहीं था, केवल 3-4 फीट पानी था। लेकिन, अचानक आए बहाव ने कई जिंदगियों को मंझधार में डाल दिया।

अभिषेक को शुभ ने खींचकर किनारे किया। इसके बाद शुभ ने दीपक को बचाने की कोशिश की, लेकिन दीपक को पता था कि उन्हें बचाने के चक्कर में शुभ भी डूब जाएगा इसलिए उन्होंने उसे किनारे धक्का दे दिया।

आरती पति को याद कर रोने लगती हैं। शादीशुदा जिंदगी की खट्टी मीठी यादें.. पति का चेहरा जेहन में घूमता है, लेकिन एक भयावह थपेड़े ने वह दीपक बुझा दिया है.. जिसके बगैर आरती अधूरी हैं।

ढाई घंटे देर से पहुंची थी पुलिस

शिवपुरी में हुए हादसे में मौजूद प्रशांत ने बताया कि दो लोगों के डूबने के समय पुलिस कंट्रोल रूम को वहां खबर की गई थी, लेकिन पुलिस वहां करीब ढाई घंटे बाद पहुंची। बचाव कार्य के लिए मौके पर केवल तीन गोताखोर ही पहुंचे थे।

इनमें से केवल एक के पास लाइफ जैकेट थी। वहीं, दो ने बिना लाइफ जैकेट के पानी में जाने से मना कर दिया था। पुलिस और गोताखोरों के आने के बाद भी बचाव कार्य नहीं चला। रविवार को अधिकारियों के दबाव में बचाव कार्य शुरू किया गया।

शिवपुरी में हुए हादसे में साथ रहे प्रशांत ने बताया कि वहां पर खतरे का कोई भी साइन बोर्ड नहीं लगा था। वहीं, पुलिस जब ढाई घंटे बाद पहुंची तो मदद करने के बजाए उनके प्रति पुलिस का रवैया बेहद खराब था।

हर आहट पर चौंक जा रहे हैं परिजन

गमगीन परिजन दीपक द्विवेदी और मोहम्मद सिद्दीकी की राह देख रहे हैं। घर के बाहर हर आहट पर वे चौंक उठते हैं और तेजी से दरवाजे तक पहुंच जाते हैं। उन्हें आशा है कि शायद ऊपर वाले के करम से दोनों बच गए हों और सकुशल नदी के किनारे लग गए हों।

नोएडा सेक्टर-51 के ए-11 में सिद्दीकी का परिवार रहता है तो उसके ठीक ऊपर वाले फ्लैट पर दीपक सपत्नी रहते थे। कॉलोनी के लोगों का कहना था कि सभी दोस्तों का अक्सर कॉलोनी के बाहर ही जमावड़ा लगता था।

शुक्रवार शाम को सभी घूमने जाने के लिए प्लान बना रहे थे। कॉलोनी वालों ने बताया कि देर शाम को सभी हस-खेल रहे थे। ग्रुप में सभी युवा 20 से 30 साल के थे।
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दीपक को ढूंढने के लिए 11 हजार का इनाम

दीपक द्विवेदी की पत्नी आरती ने दीपक की खबर देने वाले या ढूंढ कर लाने वाले को वाट्सएप के माध्यम से 11 हजार रुपये इनाम का एलान किया है।

आरती ने बताया कि उसको छह जुलाई को ही सिंगापुर के लिए निकलना था। शनिवार दोपहर जब सूचना मिली तब वो लखनऊ में थीं। यहां से वो रात में दिल्ली के मीठापुर स्थित ससुराल और वहां से सभी परिजनों के साथ रविवार सुबह पांच बजे ऋषिकेश में घटना स्थल पर पहुंची थीं।

कॉलोनी के दोस्त मोहम्मद सिद्दीकी को ‘सिड’ के नाम से बुलाते थे। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले ही उसने नोएडा के एक कॉल सेंटर में जॉब ज्वाइन की थी। जिसके बाद से वह काफी खुश था। उसके घर में माता-पिता, बड़ा भाई और एक छोटी बहन है।
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