जालसाज तकनीकी रूप से दक्ष है जिसका ठगी में फायदा उठाते थे। प्रॉपर्टी से जुड़ी वेबसाइटों से ये लोग डाटा खरीद लेते थे। इस डाटा के आधार पर ये लोग नोएडा-ग्रेटर नोएडा में प्रॉपर्टी देखने वालों को शॉर्ट लिस्ट कर देते थे। इसके बाद प्रॉपर्टी खरीदने वाले शख्स से खुद ही फोन पर बात करते थे।
उन्हें नोएडा-ग्रेटर नोएडा के किसी खाली प्लॉट के मालिक से सीधे मार्केट रेट से कम कीमत में दिलाने का लालच देते थे। खरीदार के कहने पर नोएडा के किसी स्थान पर मुलाकात भी करा देते थे और मौके पर जाकर खाली प्लॉट भी दिखा देते थे।
इस दौरान गिरोह के ही सदस्यों में कोई एक मालिक व उसका रिश्तेदार बन जाता था जो मालिक बनता था वह सोने की चेन व महंगे कपड़े पहनकर बड़ी कार से आता था। इसके बाद अगर खरीदार जमीन के कागज मांगता था तब उसे फर्जी मुहर लगे कागज दिखाकर झांसे में लिया जाता था।
आरोपी एडवांस के रूप में 50 हजार रुपये से एक लाख रुपये तक ही लेते थे, ताकि किसी को कोई शक न हो और आसानी से पैसे मिल जाएं। खरीदार का भरोसा जीतने के लिए यह कहकर एक फर्जी चेक भी देते थे कि अगर उन्हें ये डील पसंद नहीं आई तो चेक से आप अपने पैसे वापस ले सकते हैं।
जबकि जिस बैंक का चेक देते थे उसमें पैसा नहीं रखते थे। यह देखकर खरीदार आसानी से इन पर भरोसा कर लेता था। किसी एक प्रॉपर्टी को कई लोगों को बेचने का झांसा देकर 5-6 महीने बाद ये जालसाज अपना नंबर बंद कर ऑफिस भी बदल देते थे।
कंपनी डूबी तो बन गया जालसाज
क्षेत्राधिकारी प्रथम अवनीश कुमार ने बताया कि आरोपी अनुभव श्रीवास्तव ने 2015 तक नोएडा में दो अलग-अलग कंपनियां खोली थीं। जब इसमें उसका नुकसान हो गया तो बेरोजगारी के दौरान उसकी मुलाकात गिरोह के सरगना प्रकाश से हुई। इसके बाद वह भी इसमें शामिल हो गया। जालसाज अब तक 30 से ज्यादा स्थानों पर अपना ऑफिस बदल चुके हैं।