दक्षिण-पूर्व दिल्ली के जामिया नगर स्थित फ्लैट में बिस्तर पर मां आफताब (65) की लाश सड़ती रही। हैरानी की बात थी कि उनका बेटा उस वक्त घर पर मौजूद था, लेकिन वह ऐसी हालत में था कि न तो उसने किसी को सूचना दी और न अपने माता-पिता दी मदद कर सका। बताया जा रहा है कि वह मानसिक रूप से बीमार है। महिला के पति भी घर में ही मौजूद थे, मगर वह काफी बीमार थे। पुलिस ने महिला के शव को अस्पताल में रखवा दिया है। बीमार को पति को एम्स के ट्रामा सेंटर में और बेटे को इबहास में भर्ती कराया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांंच में लग रहा है कि वृद्धा की मौत बीमारी के चलते हुई है। पोस्टमार्टम के बाद ही मौत के कारणों का पता लग सकेगा।
दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस उपायुक्त डाॅ. हेमंत तिवारी ने बताया, जामिया नगर के क्वीन अपार्टमेंट निवासी सिराज खान और उनकी पत्नी आफताब लंबे समय से बीमार थे। सिराज जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में संगीत शिक्षक रह चुके हैं। उम्र और बीमारी ने उन्हें कमजोर कर दिया था। उनका 48-50 साल का बेटे इमरान मानसिक रूप से बीमार है। इमरान ने पहले अपनी बीमारी का इलाज करवाया था, लेकिन वह अपने माता-पिता की देखभाल करने में असमर्थ था। घर में अकेले रहते हुए वह न तो पड़ोसियों से मदद मांग पाया और न ही रिश्तेदारों को अपनी स्थिति बता पाया।
बेटी ने किया रिश्तेदार को फोन
चार दिन पहले सिराज और आफताब की हालत बिगड़ गई। दोनों बिस्तर पर बिना खाए-पिए और बिना किसी सहारे के पड़े थे। मानसिक रूप से कमजोर कमजोर इमरान यह नहीं समझ पाया कि माता-पिता की हालत कितनी नाजुक हो चुकी है। वह बस घर में बंद रहा और किसी को कोई खबर नहीं दी। इस बीच हांगकांग में रहने वाली उनकी बेटी अपने माता-पिता और भाई से संपर्क करने की कोशिश कर रही थी। कई दिनों तक कोई जवाब न मिलने पर उसने अपने मामा जामिया नगर में रहने वाले अहमद खान से हाल जानने को कहा।
दरवाजा तोड़कर निकाला गया शव
पुलिस उपायुक्त डा. हेमंत तिवारी ने बताया कि 21 सितंबर की रात 11.10 बजे, अहमद खान ने पुलिस को फोन किया कि उनके भांजे इमरान की आवाज तो सुनाई दे रही है लेकिन घर का दरवाजा नहीं खुल रहा। पुलिस तुरंत क्वीन अपार्टमेंट पहुंची तो दरवाजा अंदर से बंद था। पड़ोसियों की मदद से दरवाजा तोड़ा गया। अंदर का दृश्य देखकर सभी सन्न रह गए। बेडरूम में आफताब जहां का शव पड़ा था जो बुरी तरह सड़ चुका था। उनके पति सिराज खान उसी बिस्तर पर गंभीर हालत में पड़े थे। इमरान बाहर बैठा था, लेकिन वह ठीक से कुछ बता नहीं पा रहा था। उसने बस इतना कहा कि माता-पिता सो रहे हैं।
कई दिनों से कुछ नहीं खाया पिया था
पूछताछ करने पर बेटा इमरान ठीक से बोल नहीं पाया और उसने बताया कि उसके माता-पिता सो रहे हैं। वह पिछले 3-4 दिनों से बिना कुछ खाए-पिए घर में ही बंद है। शर्म वाली बात ये है कि पड़ोसी व रिश्तेदारों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया कि एक घर से कुछ दिनों कोई हलचल नहीं हो रही है। पुलिस ने बुजुर्ग सिराज को तुरंत एम्स ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया, जहां उनकी हालत गंभीर लेकिन स्थिर है। इमरान को मानसिक इलाज के लिए शाहदरा के आईबीएचएएस अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे जीटीबी अस्पताल रेफर किया गया। कोई बाहरी चोट का निशान नहीं मिला है। दुख की बात यह रही कि कोई रिश्तेदार इमरान की देखभाल के लिए आगे नहीं आया। फिलहाल मामले की जांच जारी है