तीन साल से भरा हुआ है पानी
लोगों ने बताया कि तीन साल से यहां पानी भरा हुआ है। बारिश के दिनों में जलस्तर काफी बढ़ जाता है। इसकी शिकायत कई बार अधिकारियों से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों से की जा चुकी है। इसके बावजूद पानी हटाने के लिए कोई पहल नहीं की गई है।
एक साल पहले भी हुई थी बच्चे की मौत
लोगों ने बताया कि बारिश के दिनों में यहां जलभराव होने के बाद बच्चों के डूबने का खतरा बढ़ जाता है। खाली प्लॉट में बच्चे खेलने आते हैं। प्लॉट में कहीं गहरा गड्ढा है। इसमें चले जाने से बच्चे डूब जाते हैं। एक साल पहले एक बच्चे की मौत हो चुकी है। शिकायत के बावजूद कोई कदम नहीं उठाने से फिर से हादसा हुआ है। खाली जमीन में चहारदीवारी कर दी गई थी, लेकिन समय बीतने के साथ कई जगहों पर चहारदीवारी टूट चुकी है। इससे बच्चे उस क्षेत्र में भी घुस जाते हैं, जहां डूबने का खतरा रहता है। कई बार बच्चों को डूबने से बचाया भी गया है।
डीडीए ने वर्ष 2007 में प्लॉट को डीएसआईआईडीसी को सौंप दिया था
डीडीए का कहना है कि जहां पर हादसा हुआ, वह प्लाॅट 2007 में डीएसआईआईडीसी को सौंप दिया गया था। घटना को दुखद और दर्दनाक बताते हुए डीडीए ने पीड़ित परिवार के लिए गहरी संवेदना है। अधिकारियों का कहना है कि प्लॉट करीब 150 एकड़ का है। इस पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित होना है। इसी साल जनवरी में उपराज्यपाल ने इसकी घोषणा भी की थी। अभी तक यहां निर्माण नहीं शुरू हो सका है।
शुरुआती जांच में पता चला है कि बच्चे नहाने के लिए गए थे। गहरे पानी में जाने से दोनों डूब गए। पुलिस को रात में संजय गांधी अस्पताल से घटना की जानकारी मिली थी। पुलिस लापरवाही से मौत का मामला दर्ज कर जांच कर रही है। - गुर इकबाल सिंह सिद्धू, पुलिस उपायुक्त, रोहिणी जिला