गणेश मूर्ति विसर्जन के दौरान बवाना नहर में डूबकर 20 वर्षीय एक युवक और 12 वर्षीय एक बच्चे की मौत हो गई, जबकि एक बच्चा पानी के तेज बहाव में लापता हो गया। इस हादसे के चलते मौके पर पहुंची बोट क्लब की टीम ने दो लड़कों के शव कड़ी मशक्कत के बाद नहर से बरामद कर लिए, जबकि तीसरे लड़के की तलाश जारी है।
तीनों लड़के मूर्ति विसर्जन के लिए आई एक ही टोली में मंगोलपुरी से आए थे। बताया जा रहा है कि जिस जगह पर यह हादसा हुआ वहां पर मूर्ति विसर्जन के लिए घाट नहीं है और इसी लापरवाही के चलते यह हादसा हुआ।
बोट क्लब इंचार्ज हरीश के मुताबिक रविवार शाम को अंशू 20, दीपक 12 और रंजन 12 गणेश मूर्ति विसर्जन के लिए मंगोलपुरी से अपने परिवारों और अन्य लोगों के साथ बवाना नहर के खेड़ा पुल पर पहुंचे थे। यहां पर मूर्ति विसर्जन के दौरान अंशू, दीपक और रंजन तीनों नहर के तेज बहाव की चपेट में आकर डूब गए।
इस घटना के चलते शाम करीब साढ़े 4 बजे पुलिस को सूचना मिली। इसके बाद मौके पर पहुंची बोट क्लब की टीम ने चार गोताखोरों और एक मोटर बोट की मदद से करीब सवा घंटे की मशक्कत के बाद नहर से अंशू और रंजन अचेत अवस्था में मिल गए। इसके बाद उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया, जबकि दीपक की तलाश जारी है। दीपक के पिता का नाम त्रिलोकचंद बताया गया है।
मूर्ति विसर्जन के लिए बनें हैं 7 घाट
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए राजधानी दिल्ली में सात घाट बनाए हैं। जिनमें जगतपुर स्थित श्याम घाट, सिविल लाईन स्थित गीता घाट व कुदेसिया घाट, आईटीओ स्थित हाथी घाट, डीएनडी पुल स्थित मयूर विहार घाट और कालिंदी कुंज घाट शामिल हैं। बोट क्लब द्वारा गणेश मूर्ति विसर्जन करने वाले श्रद्धालुओं से अपील की है लोग अपनी जान को जोखिम डालकर नहर पर कहीं भी मनमुताबिक मूर्ति विसर्जन न करें। इन सभी घाटों पर श्रृद्धालुओं की सुरक्षा और बचाव के लिए दो-दो मोटर बोट, गोताखोर और पुलिस की टीमें तैनात की गई हैं।