नगर निगम चुनाव के लिए हुई वार्डबंदी ने इस बार पार्टियों की राजनीतिक समीरकण बिगाड़ दिया है। नई वार्डबंदी के साथ आरक्षित हुए वार्ड के कारण अब राजनीतिक पार्टियां अपने उम्मीदवारो के चयन को लेकर माथापच्ची करने में जुटी हुई है। पार्टी सिंबल पर चुनाव लड़ रही पार्टियां उम्मीदवार को उतारने से पहले वहां स्थानीय स्तर पर सर्वे कराने में जुटी हुई है, ताकि पता चल सके कि किस उम्मीदवार के लिए वह सीट मुफिद होगी।
कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव नहीं लडने के कारण भाजपा और इनेलो अपने सिंबल पर उतरने से आमने सामने हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी ने अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं किया है। प्रदेश अध्यक्ष द्वारा कांग्रेस सिंबल को लेकर पहले घोषणा और फिर आलाकमान की रोक ने पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ दिया है और अब वहां अंदरुनी खाने पर लड़ाई जारी है। तंवर और हुडा गुट की लड़ाई के बीच भाजपा भुनाने में जुटी हुई है।
35 वार्डों के हुए उम्मीदवार तय करने से पहले पार्टी अपने स्तर पर वहां जातीय समीकरण भी ढूंढ रही है। बता दें कि पिछले चुनाव पर नजर डालें तो 35 वॉर्ड में से 12 जाट प्रत्याशी, 9 अहीर, 7 अनुसूचित जाति, 3 पंजाबी, 3 गुर्जर व एक वैश्य समाज से जीत कर आए थे। इस बार यह आंकड़ा बदल सकता है क्योंकि वॉर्डबंदी ने न केवल इलाके बदले हैं, बल्कि कई ऐसे वॉर्ड हैं जिनमें एक जाति समीकरण होने के बावजूद रिजर्व हो गए हैं।
इस बार सबसे ज्यादा जोर मेयर पद के लिए है। नगर निगम का मेयर पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित होने से अब सभी पार्टियां ऐसे उम्मीदवारों की तलाश कर रही है, जिसका बैकग्राउंड सभी जातियों के लिए फिट हो। नगर निगम चुनावों के लिए 10 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं।
इस वजह से इस बार 10 वार्ड में महिला उम्मीदवारों की भी लंबी लाइन है। नई वार्डबंदी के अनुसार वॉर्ड नंबर-6 में पिछली बार भाजपा से ताल्लुक उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी, जबकि इस अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व है। वॉर्ड नंबर 5 से कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार ने चुनाव जीता था, लेकिन यह वॉर्ड इस बार सामान्य वर्ग की महिला के लिए रिजर्व हो गया है।