बच्चों की रक्षा के लिए बनाए गए कानून की धज्जियां उड़ाने और इंसानियत को कलंकित करने वाला एक मामला प्रकाश में आया है। दिल्ली के अमर कॉलोनी स्थित एक अंध विद्यालय में तीसरी क्लास में पढ़ने वाले दो लड़कों के साथ स्कूल के ही टीचर ने कुकर्म किया।
यह घटना एक साल पुरानी है। दोषी टीचर के गुनाह कबूल कर लेने के एक साल बाद भी इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। बता दें कि पुलिस को घटना के तुरंत बाद ही इतल्ला कर दी गई थी और वह मौके पर पहुंची भी थी। इसके बावजूद स्कूल प्रशासन ने इस मामले में 9 महीने बाद शिकायत दर्ज कराई।
आरोपी टीचर के खिलाफ नहीं हुई एफआईआर
जानकारी के अनुसार पिछले साल 14 नवंबर यानी बाल दिवस के दिन आरोपी टीचर ने दो नेत्रहीन बच्चों के साथ कुकर्म की कोशिश की थी। ये दोनों ही बच्चे सरकारी सहायता प्राप्त हॉस्टल में रहते हैं।
इस घटना के दो दिन बाद ही दोनों बच्चों ने अपने साथ पढ़ने वाले बच्चों के साथ मिलकर स्कूल के वाइस प्रिंसिपल को इस पूरे वाकये के बारे में चिट्ठी भी लिखी थी। उन दोनों के साथ ही स्कूल के अन्य नेत्रहीन बच्चों ने भी आरोपी टीचर के खिलाफ लगातार छेड़छाड़ की शिकायत की।
हालांकि वाइस प्रिंसिपल ने उस वक्त पुलिस को बुलाया पर टीचर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के बजाए उन्होंने टीचर को कारण बताओ नोटिस जारी कर छोड़ दिया। इसके बाद पुलिस ने भी इस मामले में आगे कोई जांच नहीं की।
दिल्ली कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स के चेयरपर्सन अरुण माथुर का कहना है कि, यह घटना बच्चों की सुरक्षा करने वाले कानून पॉक्सो एक्ट का सीधे-सीधे उल्लंघन है। पॉक्सो एक्ट के अनुसार पुलिस को किसी भी यौन शोषण के मामले में उसी समय एफआईआर दर्ज करना जरूरी है, जब पुलिस को उसकी शिकायत मिल जाए।
पिता के लगातार शिकायत के बाद हुई कार्रवाई
जानकारी के अनुसार आरोपी टीचर को कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया था और वादा किया था कि वह ऐसी गलती दोबारा नहीं करेगा। आरोपी के इस कबूलनामे के बावजूद स्कूल ने उसके खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं कराया।
इतना ही काफी नहीं था, इसके बाद पीड़ित दोनों बच्चों में से एक को वाइस प्रिंसिपल ने जुलाई में हॉस्टल छोड़ने का भी आदेश जारी कर दिया। वाइस प्रिंसिपल ने अपने आदेश में वार्डन को लिखा कि उस बच्चे को हॉस्टल से निकाल दो क्योंकि वह अच्छा विद्यार्थी नहीं और उसका चरित्र भी ठीक नहीं है।
स्कूल अथॉरिटी ने तब जाकर कोई कदम आगे बढ़ाया जब दोनों बच्चों में से एक के पिता ने इस बारे में लगातार स्कूल प्रशासन को लिखकर आरोपी टीचर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पीड़ित के पिता ने पत्रों की एक श्रृंखला जुलाई में स्कूल को भेजी।
पिड़ित के पिता के लगातार प्रयास के बाद आखिरकार अगस्त में स्कूल के सेक्रेटरी ने अमर कॉलोनी पुलिस स्टेशन के एसएचओ के पास शिकायत दर्ज कराई। लगभग एक साल बाद अब जाकर पुलिस ने इस मामले पर दो जांच समितियां भी बैठाई हैं।
पुलिस बोली, बच्चों संग नहीं हुआ शोषण
दोनों ही समितियों ने अलग-अलग आधार पर आरोपी टीचर को दंड देने व स्कूल ने निष्कासित करने की मांग की है। इन समितियों ने पुलिस के साथ मिलकर इस मामले को रफा-दफा करने के लिए वाइस प्रिंसिपल की भी आलोचना की है।
आंतरिक जांच समिति के एक सदस्य का कहना है कि इतना सब हो जाने के बाद भी अब तक न आरोपी टीचर और ना ही वाइस प्रिंसिपल के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई की गई है।
स्कूल प्रशासन का दावा है कि उसने टीचर के खिलाफ अब केस दर्ज करा दिया है। हालांकि पुलिस स्कूल इस दावे से इतर कुछ और ही कह रही है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार इस केस में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है क्योंकि पीड़ितों ने उनके साथ हुए ऐसे किसी भी हादसे से इंकार कर दिया है। पीड़ित कहते हैं कि उनके साथ किसी तरह का शोषण नहीं हुआ है।
पुलिस के अनुसार उसने दोनों अंधे बच्चों का बयान तीन अलग-अलग तारीखों पर दर्ज किया है। तीनों ही बयानों में पीड़ितों ने यौन शोषण की बात को सिरे से खारिज कर दिया था।
हालांकि एक अंग्रेजी अखबार ने दावा किया है कि उसके पास जांच समिति की रिपोर्ट, पीड़ित के पिता द्वारा स्कूल को लिखे गए पत्र, टीचर को दिए गए कारण बताओ नोटिस और उसके उत्तर की कॉपी मौजूद है।