गांजा की इस खेप को पकड़वाने में सिविल डिफेंसकर्मी प्रदीप शर्मा की भूमिका अहम है। देर रात उसकी तैनाती आजादपुर मंडी में थी। उसने एक केंटर को फ्रूट मंडी में खड़ा देखा। जिसका पिछला डाला खुला हुआ था। केंटर में प्लास्टिक बैग पड़े थे। लेकिन उसने सोचा की फल का सप्लाई लकड़ी के बॉक्स में होता है जबकि सब्जी की सप्लाई जूट के बैग में होता है। ऐसे में प्लास्टिक में पैक सामान क्या है। चालकों ने पूछताछ में बताया कि उसमें सोयाबीन है। लेकिन शक होने पर उसने गश्त कर रहे पुलिसकर्मियों की इसकी जानकारी दे दी।
पहले भी अनाज, सब्जी और फल की आड़ में होती रही है गांजे की तस्करी
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि तस्कर पहले भी अनाज, सब्जी और फल की आड़ में गांजे की सप्लाई करते रहे हैं। इसके लिए ट्रांसपोर्ट कंपनी में कार्यरत ड्राइवरों को जल्द पैसे कमाने का लालच दिया जाता है। इससे पहले भी क्राइम ब्रांच 280 किलो गांजा की खेप को पकड़ चुका है जिसे धान की आड़ में लाया गया था।
उड़ीसा, झारखंड, छत्तीसगढ और विशाखापत्तनम से करते हैं तस्करी
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि तस्कर उड़ीसा, झारखंड, छत्तीसगढ और विशाखापत्तनम से करते हैं दिल्ली व एनसीआर में गांजा की तस्करी। तस्करों का नेटवर्क भारत के विभिन्न राज्यों में फैला हुआ है। जो ट्रक चालकों या फिर किराए पर चलने वाले कार चालकों की मदद से दिल्ली में गांजा की खेप को पहुंचाते हैं। यहां तक कि उड़ीसा के भुवनेश्वर से कार से ही तस्करी की जा रही है। जबकि हाल में विशाखापत्तनम से खेप लाया जा रहा है। इसके लिए तस्कर वहां से खाने पीने का सामान लेकर आने वाले ट्रक चालकों को अपने जाल में फंसाते हैं।