शर्म आनी चाहिए भाजपा को: सौरभ भारद्धाज
आप के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा विधायक इसलिए दुखी थे कि आप विधायक वीआईपी एरिया में क्यों बैठे है। देरी से पहुंचने के बावजूद पहले मंच पर बोलने की मांग कर रहे थे। भाजपा विधायकों ने आप विधायक राखी बिड़लान के हाथ से कागज छीन कर फाड़ दिए। भाजपा वालो शर्म करो उत्तर प्रदेश में बिजली के दाम कम करो।महिला विधायकों के साथ अभद्र व्यवहार किया:राखी बिड़लान
आप विधायक राखी बिड़लान ने विजेंद्र गुप्ता पर महिला विधायकों को मंच पर बोलने नहीं देने का आरोप मढ़ा। उन्होंने कहा है कि बिजली मुद्दे पर बोलने वाले कागज तक को फाड़ दिया गया। महिला विधायकों के साथ भाजपा विधायकों ने अभद्र व्यवहार किया। आप के बागी नेता देवेंद्र सेहरावत पर बिड़लान ने अभद्र टिप्पणी करने, गाली देने व गंदे इशारे करने का आरोप मढ़ा। कहा कि दलबदलू नेता सेहरावत की टिप्पणी शर्मनाक है। दिल्ली पुलिस पर भी आरोप लगाया। कहा कि दिल्ली पुलिस की उपस्थिति में चुने हुए प्रतिनिधियों पर गलत टिप्पणी की गई।
डीईआरसी ने आपत्ति व सुझाव मांगा था
बिजली कंपनियों के वार्षिक खर्च व उनकी मांगों को अपनी वेबसाइट पर पेश करने के साथ ही डीईआरसी ने लोगों से आपत्ति और सुझाव मांगे थे। बिजली वितरण कंपनियां डिस्कॉम घाटे का हवाला देकर बिजली की दरें बढ़ाने की मांग कर रही हैं। बिजली खरीद व पारेषण की दरें बढ़ने, सातवें वेतन आयोग लागू होने व न्यूनतम मजदूरी बढने के कारण खर्चे बढ़ने का हवाला दे रही है।
बाम्बे सबअर्बन इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई की दो कंपनियां बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड और बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड दक्षिणी दिल्ली, मध्य दिल्ली और पूर्वी दिल्ली में 42 लाख उपभोक्ताओं को बिजली पहुंचाती है। वहीं टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन लिमिटेड उत्तर दिल्ली और उत्तर पश्चिमी दिल्ली में रहने वाले 16:4 लाख उपभोक्ताओं को बिजली देती है।
नेताओं का रहा जमावड़ा
जनसुनवाई में भाजपा विधायक विजेंद्र गुप्ता, विधायक ओपी शर्मा, जगदीश प्रधान, सुनिल यादव, देवेंद्र सेहरावत, आप विधायक जरनैल सिंह, राखी बिड़लान, सरिता सिंह, वंदना कुमारी, कमांडो सुरेंद्र सिंह, संजीव झा, सोमदत्त, ऋतुराज, प्रवीण कुमार समेत कई नेता मौजूद हैं
मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों फिक्स चार्ज कम करने के लिए कहा था
पिछले दिनों दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि दिल्ली में फिक्स चार्ज कम होने चाहिए। इस पर डीईआरसी को जनसुनवाई करने के लिए कहा गया था। पहले बिजली के फिक्स चार्ज प्रतिकिलोवॉट 20 रुपये लगते थे अब सरकार की बिना अनुमति के बढ़ाकर सवा सौ रुपया कर दिया गया। डीईआरसी के आदेश जारी करने के बाद सरकार के पास कम करने का कोई चारा नहीं था।