ईपीसीए की कार्य नीति पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए सौरभ भारद्वाज ने कहा कि एक तरफ तो ईपीसीए कहती है कि मेट्रो दिल्ली के लिए बेहद जरूरी है, इससे दिल्ली में प्रदूषण का स्तर घटेगा। दूसरी ओर जब दिल्ली सरकार मेट्रो के लिए 6 कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव देती है, तो ईपीसीए मात्र तीन कॉरिडोर बनाने की बात करती है। जब दिल्ली सरकार 6 कॉरिडोर के लिए पैसा देने को तैयार है तो तीन कॉरिडोर क्यों? क्योंकि केंद्र सरकार ऐसा चाहती है।
इस पूरे प्रकरण को देखा जाए तो ऐसा प्रतीत होता है कि ईपीसीए केंद्र सरकार के अधीन आने वाला एक संस्थान बन गया है। ईपीसीए के चेयरमैन भूरे लाल जी ने अपने जीवन काल में जो ख्याति कमाई थी, वह इस एक प्रकरण से धूमिल होती नजर आ रही है।
ईपीसीए द्वारा प्रस्तुत कि गई रिपोर्ट पर बात करते हुए सौरभ भारद्वाज ने कहा कि ईपीसीए की रिपोर्ट के मुताबिक इन 6 कॉरिडोर में से 3 जगह मेट्रो की ज़रूरत नही है, जैसे लाजपत नगर से साकेत, इंद्रलोक से इंद्रप्रस्थ, रिठाला से बवाना होते हुए नरेला तक मेट्रो की जरूरत नही है। सिर्फ 3 फेस की बात ईपीसीए और केंद्र सरकार कर रही है।
दिए गए इन तीनों कॉरिडोर पर बात करते हुए सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह दो प्रकार से गलत है। पहला तो यह कि इन तीनों जगहों पर रहने वाले दिल्लीवासियों को मेट्रो की सेवाओं से वंचित किया जा रहा है। दूसरा यह कि दिल्ली सरकार का सारा पैसा दिल्ली के करदाताओं से आता है, तो केंद्र सरकार इन कॉरिडोर का सारा खर्चा दिल्ली सरकार के ऊपर डाल कर क्यों दिल्ली के करदाताओं पर भार बढ़ाना चाहती है?
सौरभ भारद्वाज ने बताया कि इस संबंध में मैंने ईपीसीए के चेयरमैन भूरे लाल जी को एक पत्र लिखकर दोबारा से इस प्रकरण पर विचार करने का अनुरोध किया है। मुझे पूरी आशा है कि जिस प्रकार की उनकी छवि रही है, वह इस प्रकरण पर दोबारा विचार करके सही निर्णय लेंगे।