चाइल्ड पोर्नोग्राफी केस
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
साकेत कोर्ट ने चाइल्ड पोर्नोग्राफी मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी मामले में डिजिटल सबूत आरोपी को अपराध से जोड़ते हैं, तो कथित तौर पर इस्तेमाल किया मोबाइल बरामद न होने से मुकदमा नहीं रुकेगा। अदालत ने फेसबुक पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री अपलोड करने के आरोपी के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश को बरकरार रखते हुए यह टिप्पणी की।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरगुरवरिंदर सिंह जग्गी ने आरोपी आदित्य बिस्वास की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। आरोपी ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67बी के तहत आरोप तय करने का निर्देश दिया गया था। यह धारा बच्चों से जुड़े यौन रूप से स्पष्ट सामग्री के प्रकाशन या प्रसारण से संबंधित है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अगर आईपी लॉग, सब्सक्राइबर डेटा और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड यह संकेत देते हैं कि संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट आरोपी के नियंत्रण में था, तो आरोप तय करने के लिए मोबाइल फोन की बरामदगी अनिवार्य नहीं है।
मामला दिसंबर 2022 में दक्षिणी दिल्ली साइबर पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। यह एफआईआर नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) को अमेरिका स्थित नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन (एनसीएमईसी) से मिली साइबर टिपलाइन रिपोर्ट के आधार पर दर्ज की गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, नीम बिस्वास नाम के एक फेसबुक अकाउंट से 17 सेकंड का ऐसा वीडियो अपलोड किया था, जिसमें एक बच्चे को यौन रूप से स्पष्ट हरकत करते हुए दिखाया गया था। जांच में आईपी एड्रेस और मोबाइल नंबर के आधार पर अकाउंट का पता लगाया गया।