मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्रायल कोर्ट में उनके खिलाफ दायर मानहानि मामले में की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों को हटाने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। अदालत ने इस मुद्दे पर मानहानि मुकदमा दायर करने वाले वित्त मंत्री अरुण जेटली से जवाब मांगा है।
जेटली ने दायर आपराधिक मानहानि की शिकायत में आरोप लगाया था कि केजरीवाल, आशुतोष, कुमार विश्वास, संजय सिंह, राघव चड्ढा और दीपक वाजपेई ने दिल्ली और जिला क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) विवाद में उन्हें बदनाम किया है, जबकि वे एक दशक से अधिक समय से डीडीसीए के अध्यक्ष रहे है।
जेटली ने दिल्ली उच्च न्यायालय में इन सभी के खिलाफ 10 करोड़ रुपये के मुआवजे को लेकर याचिका दायर की हुई है।
न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने जेटली को नोटिस जारी कर स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न केजरीवाल के खिलाफ की गई टिप्पणियों को हटाया जाए। ट्रायल कोर्ट ने अभियोग तय करते हुए कई टिप्पणियां की थी। अदालत ने मामले की सुनवाई 13 जुलाई तय की है।
ट्रायल कोर्ट के समक्ष केजरीवाल और अन्य सभी ने आवेदन दायर कर जेटली की याचिका खारिज करने का आग्रह किया था लेकिन अदालत ने उनके आवेदन को खारिज करते हुए कहा कि यह याचिका मेरिट पर नहीं है और मात्र कार्यवाही को रोकने के उद्देश्य से दायर की गई है। इसके अलावा अदालत ने केजरीवाल के उस आवेदन को भी खारिज कर दिया था कि उन्होंने जेटली को बदनाम करने के लिए कोई टिप्पणी नहीं की थी।
केजरीवाल की ओर से पेश वकील ने दावा किया कि उनके द्वारा की गई टिप्पणियों को समाचार प्रकाशनों और सोशल मीडिया मीडिया अलग निष्कर्ष निकाल लिया था। अदालत ने केजरीवाल के अधिवक्ता को अगली सुनवाई के दौरान मीडिया द्वारा निकाले गए निष्कर्ष संबंधी दस्तावेज 22 मई तक पेश करने का निर्देश दिया है।
हालांकि केजरीवाल के वकील ने इन खबरों या सोशल मीडिया निष्कर्षों को नहीं दायर किया था, इसलिए अदालत ने 22 मई तक उनकी याचिका के समर्थन में दस्तावेजों को दाखिल करने का समय दिया।