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गणित की आंसरशीट का होगा ट्रेंड एनालिसिस - अनिल स्वरूप

Mon, 02 Apr 2018 10:15 AM IST
सीमा शर्मा /अमर उजाला, नई दिल्ली
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सेक्रेटरी ऑफ एजुकेशन अनिल स्वरूप - फोटो : ani
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पेपर लीक के चलते बेशक सीबीएसई की साख पर सवाल खड़े हो रहे हैं, लेकिन छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। सोशल मीडिया पर हिंदी और पॉलिटिक्ल साइंस के दोनों अपलोड पेपर फर्जी पाए गए हैं। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे गुमराह न हों। सीबीएसई हर पल इन फर्जी पेपर पर अपडेट देता रहेगा।

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केंद्र सरकार ने छात्रों और अभिभावकों से संयम बरतने की अपील करते हुए आश्वासन दिया है कि ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए फूल प्रूफ व्यवस्था होगी। इसमें लिप्त लोगों पर सख्त कार्रवाई होगी। अमर उजाला संवाददाता सीमा शर्मा ने केंद्र सरकार के स्कूल शिक्षा सचिव अनिल स्वरूप से इस मुद्दे पर विस्तृत बातचीत की।

सवाल : 10वीं की दोबारा परीक्षा का फैसला किस आधार पर होगा ? 
जवाब: दिल्ली, एनसीआर और हरियाणा में 10वीं की गणित परीक्षा दोबारा लेने के फैसले में ट्रेंड एनालिसिस के आउटलायर का सहारा लिया जाएगा। इंटरनल
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एग्जाम 20 नंबर का होता है और एक्सटर्नल 80 का। इन इलाकों के छात्रों के इंटरल में 20 में से 10 और एक्सटर्नल में 80 में से 70 या 75 अंक आते हैं तो साफ होगा कि लीक का प्रभाव है। 

सवाल : सोशल मीडिया पर फर्जी पेपर से छात्रों को गुमराह होने से कैसे बचाएंगे? 
जवाब : मैं स्वयं ट्विटर पर लगातार छात्रों को इन फर्जी पेपर के बारे में जानकारी दे रहा हूं। बोर्ड भी छात्रों को गुमराह होने से बचाने के लिए अपनी वेबसाइट पर सुर्कलर जारी कर रहा है। हिंदी और पॉलिटिकल साइंस का पेपर सोशल मीडिया पर लीक हुआ। जांच के बाद दोनों पेपर फर्जी निकले। इसलिए छात्र और अभिभावक सोशल मीडिया पर पेपर लीक की सूचना पर विश्वास करने से पहले सरकार व बोर्ड से क्रॉसचेक अवश्य कर लें। 

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पेपर लीक होने से कैसे बचाएंगे

सवाल : आगामी पेपर लीक होने से कैसे बचाएंगे? 
जवाब : छात्रों को आश्वासन देता हूं कि पेपर लीक नहीं होने देंगे। किस स्तर पर सेंध लगी है, क्राइम ब्रांच जांच कर रही है। पेपर लीक से बचाने के लिए कई स्तर पर मॉकड्रिल चल रही है। पेपर लीक से बचाने के लिए कौन सी तकनीक प्रयोग की जाएगी, उसे साझा नहीं किया जा सकता। 

सवाल : सीबीएसई चेयरमैन को हटाने की मांग उठी है? 
जवाब : पेपर लीक से बोर्ड की साख पर सवाल उठा है। सरकार का जवाब स्पष्ट है कि जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। जांच पूरी किए बिना कोई भी कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। 

सवाल : सीबीएसई के अपना पक्ष रखने में देरी का कारण? 
जवाब : सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म जैसे यू-ट्यूब, व्हाट्स एप आदि पर कई पेपर वायरल हो रहे हैं। किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले उन सभी की जांच जरूरी थी। हालांकि गणित और इकोनोमिक्स को छोड़कर अन्य सभी पेपर फर्जी पाए गए हैं।

इन दोनों पेपर की शिकायत बोर्ड तक पहुंची। उसके बाद जांच शुरू हुई। एग्जामिनेशन कंट्रोलर ही पेपर फर्जी है या असली का सत्यापन कर सकता था। पेपर के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं होती है। परीक्षा बीच में रोकना तर्कसंगत नहीं था। गणित का पर्चा दिल्ली व हरियाणा को छोड़कर अन्य राज्यों में लीक नहीं हुआ था।
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