- छोटे ऑपरेटरों ने जताई नाराजगी, कहा- नए नियम से बढ़ेगा आर्थिक बोझ
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए 1 नवंबर 2026 से बीएस-4 ट्रकों और बसों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के फैसले को लेकर ट्रांसपोर्टरों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि इस निर्णय का सबसे अधिक असर छोटे ट्रांसपोर्टरों पर पड़ेगा, जिनकी आजीविका कुछ गाड़ियों पर ही निर्भर है। जानकारी के अनुसार, इस फैसले से दिल्ली-एनसीआर के करीब 2.07 लाख ट्रक और बसें प्रभावित होंगी। केंद्र सरकार ने पुराने वाहनों को हटाकर नए वाहन खरीदने पर पंजीकरण शुल्क माफ करने और 10 वर्षों तक मोटर वाहन कर में छूट देने की घोषणा की है, लेकिन ट्रांसपोर्टरों का मानना है कि यह राहत पर्याप्त नहीं है।
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि वर्ष 2022 तक खरीदे गए कई बीएस-4 वाहनों का लोन अभी भी चल रहा है। वहीं, ट्रकों और बसों की कीमतें पिछले वर्षों में लगभग दोगुनी हो चुकी हैं। ऐसे में पुराने वाहन बेचने पर उचित मूल्य नहीं मिलेगा और नए वाहन खरीदना छोटे कारोबारियों के लिए मुश्किल होगा। उनका कहना है कि आधुनिक तकनीक, बेहतर सड़कों और उन्नत टायरों के कारण मौजूदा बीएस-4 वाहन अभी कई वर्षों तक उपयोग योग्य हैं। बड़े ट्रांसपोर्टर अपने वाहनों को दूसरे राज्यों में संचालित कर सकते हैं, लेकिन सीमित संख्या में वाहन रखने वाले छोटे ट्रांसपोर्टरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है।
ट्रांसपोर्टरों की राय-
सबसे ज्यादा असर छोटे ट्रांसपोर्टरों पर पड़ेगा, जिनके पास सीमित वाहन हैं। -राजेंद्र कपूर, अध्यक्ष, ऑल इंडिया गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन
चार साल पहले खरीदे गए वाहनों को बंद करना आर्थिक रूप से भारी नुकसान पहुंचाएगा। -देवेंद्र सिंह काका, ट्रांसपोर्टर
सरकार बीएस-6 कन्वर्जन किट पर सहायता दे तो ट्रांसपोर्टरों को राहत मिल सकती है। -अरबिंदर सिंह, ट्रांसपोर्टर
यह फैसला छोटे ट्रांसपोर्टरों की आजीविका और कारोबार दोनों पर असर डालेगा। -राजकुमार, ट्रांसपोर्टर