21 से 23 मई तक दिल्ली-एनसीआर में ट्रांसपोर्ट यूनियनों का विरोध प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली-एनसीआर में परिवहन संगठनों ने पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ईसीसी) में बढ़ोतरी और बीएस-चार कमर्शियल वाहनों पर प्रस्तावित प्रतिबंध के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) के नेतृत्व में ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने 21 से 23 मई 2026 तक तीन दिवसीय सांकेतिक चक्का जाम का ऐलान किया है।
एआईएमटीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरीश सभरवाल के अनुसार, सीएक्यूएम और दिल्ली सरकार द्वारा ईसीसी में की गई भारी वृद्धि से ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ेगा। उनका कहना है कि यह शुल्क मूलरूप से उन ट्रांजिट वाहनों के लिए था जो दिल्ली से होकर गुजरते हैं, लेकिन अब इसे सभी वाहनों पर लागू किया गया है, जिससे दिल्ली में आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। परिवहन संगठनों का दावा है कि ईसीसी में 40 से 55 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। हल्के कमर्शियल वाहनों के लिए शुल्क करीब 2000 रुपये और भारी वाहनों के लिए लगभग 4000 रुपये तक पहुंच गया है। इससे देशभर के ट्रांसपोर्टरों में नाराजगी बढ़ी है और विरोध तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
इसके अलावा, 1 नवंबर 2026 से बीएस-चार और उससे नीचे के कमर्शियल वाहनों के दिल्ली-एनसीआर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के फैसले को भी ट्रांसपोर्टर अन्यायपूर्ण बता रहे हैं। उनका कहना है कि इससे लाखों छोटे और मध्यम परिवहन व्यवसायियों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ेगा। ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने सरकार से मांग की है कि बढ़ा हुआ ईसीसी केवल ट्रांजिट वाहनों तक सीमित किया जाए और बीएस-चार वाहनों पर लगाया गया प्रतिबंध वापस लिया जाए। चेतावनी दी गई है कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।