परिजन भले ही ट्रांसपोर्टेशन फीस के नाम पर कैब के लिए मोटी रकम चुका रहे हो, लेकिन इसके बावजूद नौनिहाल सुरक्षित नहीं है। सरेआम बच्चों की सुरक्षा से खिलावड़ किया जा रहा है। इसके लिए पुलिस को न इसकी परवाह है और ना ही प्रशासन को फिक्र।
शहर की सड़कों पर ऐसे स्कूली वाहन सरेआम दौड़ रहे हैं। जब कोई हादसा हो जाता है तो पुलिस व प्रशासन इसके लिए कुछ दिन ही इनके खिलाफ अभियान चलाया जाता है उसके बाद कोई कैसे चलो कोई नहीं पूछता है।
छुट्टीयों से पहले आरटीए ने स्कूल प्रबंधकों को 01 जुलाई तक मानक पूरे करने का समय दिया था लेकिन इसके बावजूद तीन दिन बीत जाने के बाद स्कूल वैन और ऑटो चालकों पर शिकंजा नहीं कसा गया।
बच्चों को ऑटो और कैब में तीन सीट पर पांच से छह बच्चों को बैठा दिया जाता है। कई निजी स्कूल की बसों में तो बच्चे खड़े होकर जाने को मजबूर होते हैं। दोपहर करीब एक बजे एनएच-8 पर निजी स्कूल छात्रों से भरा ओवारलोड ऑटो बच्चों की जिदंगी खतरे में डालता देखा जा सकता है।
ऑटो की पीछे की अवैध सीट पर भी छात्रों को बैठा रखा था। चालक की साइड की सीटों पर भी चालक ने छात्रों को बैठा रखा था। चिलचिलाती धूप में ऑटो तेजा गति से राजीव चौक से गुजर गया।