राजधानी में ऑटो किराये में बढ़ोतरी के मुद्दे पर अन्य सार्वजनिक परिवहन यूनियनें भी अपनी वाहन सेवाओं के लिए किराया बढ़ोतरी मांग पर उतर आयी हैं। स्थिति ऐसी है कि ग्रामीण सेवा, ईको फ्रेंडली सेवा और आरटीवी चालक संगठनों ने सरकार पर किराया बढ़ोतरी में भेदभाव करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि सरकार अगर किराया बढ़ाने की इनकी मांग पर विचार नहीं करेगी तो ये संगठन सरकार का घेराव करेंगे।
भारतीय प्राइवेट ट्रांसपोर्ट मजदूर महासंघ के दिल्ली प्रदेश उपाध्यक्ष चंदू चौरसिया ने कहा कि दिल्ली में ग्रामीण सेवा शुरू हुए 10 साल बीत चुके हैं, लेकिन इस बीच दिल्ली सरकार ने ग्रामीण सेवा का किराया एक बार भी नहीं बढ़ाया है। वहीं उनका आरोप है कि इन्हीं 10 सालों में दिल्ली सरकार ने ऑटो रिक्शा का किराया अब तीसरी बार बढ़ाया है जिससे ग्रामीण सेवा चालकों पर महंगाई की मार पड़ रही है। उनका कहना है कि इस संबंध में वह परिवहन मंत्री से कई बार किराये बढ़ाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन दिल्ली सरकार ने उनके किराये बढ़ाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।
उनका कहना है कि दिल्ली में वर्तमान में करीब 166 रूटों पर 6138 ग्रामीण सेवा वाहन चल रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि सरकार को ग्रामीण सेवा का किराया भी बढ़ाने पर जल्द विचार करना चाहिए। वहीं उन्होंने बताया कि दिल्ली में करीब 500 से अधिक ईको फ्रेंडली वाहन चल रहे हैं, इनका किराया भी नहीं बढ़ाया गया है। उन्होंने चेताया है कि अगर सरकार इस बार भी उनके किराये नहीं बढ़ाएगी तो सभी ग्रामीण चालक संगठन सरकार का घेराव करेंगे।