डीयू ने अपने निर्णय को सही ठहराते हुए तर्क दिया कि वह हर साल दाखिला के लिए मानकों में बदलाव करता है और इसकी जानकारी सूचना बुलेटिन में हर साल दी जाती है। यह हमेशा के लिए नहीं होता। इसलिए छात्रों को इसकी पूर्व सूचना देना जरूरी नहीं था। विश्वविद्यालय की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि नए माकनों से कोई छात्र दाखिले से वंचित नहीं होगा और अगर ऐसा होता है तो प्रभावित छात्र शिकायत समिति या कोर्ट आ सकता है। इसलिए इस समय कोर्ट दाखिला प्रक्रिया में हस्तक्षेप न करे क्योंकि इससे पूरी दाखिला प्रक्रिया प्रभावित होगी।
याची खुशी श्रीवास्तव की ओर से उनके पिता अधिवक्ता अनुपम श्रीवास्तव ने कहा कि अगर उसके बेस्ट ऑफ फोर विषयों में गणित को शामिल किया जाता है तो उसके कुल अंकों में एक फीसदी से ज्यादा की गिरावट आएगी। डीयू के अच्छे कॉलेज में एक फीसदी से भी कम अंकों पर दाखिला प्रभावित हो जाता है।याचिकाकर्ताओं का दावा है कि बी.कॉम आनर्स व बीए ऑनर्स अर्थशास्त्र में दाखिले के लिए किए गए मानकों में बदलाव संविधान में दिए गए समानता के अधिकार का उल्लंघन है क्योंकि यह बिना सोचे समझे मनमाने तरीके से किया गया है। इसलिए इसे रद किया जाना चाहिए। नए निमयों के मुताबिक इन दोनों पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए गणित को बेस्ट ऑफ फोर विषयों में अनिवार्य कर दिया गया है। यह जानकारी 29 मई को जारी बुलेटिन में दी गई थी और 30 मई से दाखिला प्रक्रिया शुरु होनी थी।