यातायात पुलिस ने एक बाइक का चालान कर दिया और उसे संबंधित व्यक्ति के पते पर भेज दिया। 300 रुपये का चालान जब पते पर पहुंचा तो पता चला कि जिसके नाम से चालान काटा गया था, उसी नाम से 15 साल पहले किसी और ने बाइक ले रखी थी। जबकि पीड़ित के पास बाइक ही नहीं है।
इसके बाद पीड़ित चालान लेकर एआरटीओ आफिस पहुंचा तो अफसरों ने उसे यातायात पुलिस द्वारा काटा गया चालान बताया और इसे धोखाधड़ी का मामला बताते हुए पुलिस के पास भेज दिया। अब पीड़ित चालान की प्रति लेकर भटक रहा है।
मूलरूप से बिहार निवासी आरएस झा नोएडा के सेक्टर-55 में परिवार के साथ रहते हैं। मंगलवार को उनके घर पोस्टमैन आया और उसने यातायात पुलिस की ओर से भेजा गया लिफाफा उन्हें थमा दिया। पीड़ित ने लिफाफा खोलकर देखा तो भौचक्का रह गया। लिफाफे में उनके नाम से 300 रुपये का बाइक का ऑनलाइन चालान था। जबकि उनके पास तो कोई बाइक ही नहीं है।
ऐसे में वह अचंभित हो गए कि बाइक है नहीं और चालान घर पहुंच गया। मामले की जानकारी के लिए वह चालान लेकर सेक्टर-32 स्थित एआरटीओ आफिस पहुंचे और बाइक संबंधित सूचना निकलवाई तो पता चला कि सिर्फ उनके नाम का ही नहीं बल्कि घर और अन्य दस्तावेज का प्रयोग कर करीब 15 साल पहले किसी और ने बाइक खरीदी थी।