वीकएंड और ट्रेड फेयर की जुगलबंदी से प्रगति मैदान जश्न में डूब गया। रविवार का पूरा दिन मेला आम लोगों के नाम रहा। युवाओं की भीड़ के बीच उम्रदराज लोग भी मेले का लुत्फ उठाते दिखे। सुबह से लेकर देर शाम तक खरीदारी के साथ मौज-मस्ती व पिकनिक चलती रही।
आलम ये रहा कि दोपहर बाद मेले में चलने की भी जगह नहीं बची। रविवार को डेढ़ लाख से ज्यादा दर्शक प्रगति मैदान पहुंचे। हर पवेलियन के एंट्री गेट पर दर्शकों की लंबी लाइन रही।
मौज-मस्ती के साथ ही शॉपिंग के लिए दर्शक रविवार सुबह से मेले में पहुुंचने लगे।
दर्शकों की नजर उत्तर से लेकर दक्षिण भारतीय राज्यों के पवेलियन पर रही। वहीं, पूर्वोत्तर राज्यों के पवेलियन में भी भीड़ थी। महिलाओं का विशेष जोर घरेलू उद्योग से जुड़े स्टॉल्स पर था। युवाओं ने मोबाइल, कंप्यूटर आदि एसेस्रीज के साथ इनोवेटिव व इंटरनेशनल पवेलियन की तरफ रुख किया।
किसी ने ज्वैलरी खरीदी, तो कोई सजाने-संवारने के स्टॉल पर डटा रहा। लोगों की इतनी बड़ी तादाद देखकर व्यापारी भी खुश थे। लोग आसाम, झारखंड और बिहार में बांस से बने फर्नीचर, झूले व सजावटी सामान आदि की खरीदारी करते दिखे। मोल-भाव का खेल भी खूब चला। पाकिस्तान-अफगानिस्तान आदि पवेलियन में ठंड के दिनों में भी रेशम के कपड़ों की खरीदारी जोरों पर थी।
पुराने नोटों को लेकर चली चिक-चिक
कई स्टॉल्स पर 500 व 1000 के नोटों को लेकर चिक-चिक भी देखी गई। कारोबारियों ने पहले प्लास्टिक मनी देने की अपील की, लेकिन ज्यादा खरीदारी होने पर कारोबारियों ने पुराने नोटों को यह कहते हुए स्वीकार किया कि हमारा सारा कारोबार ऑन पेपर है। दिसंबर के आखिर तक इसे बैंक में जमा करा देंगे।