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Trade Fair : सदियों पुरानी कलाकृतियों से गुलजार हुआ मेला, थ्रीडी को फेल कर रही है पारंपरिक तकनीक

Sat, 16 Nov 2024 02:17 AM IST
दुष्यंत शर्मा राकेश शर्मा, नई दिल्ली

सार

इन्हें बनाने में पारंपरिक तकनीक का इस्तेमाल होता है, लेकिन देखने में यह थ्रीडी तस्वीर को भी फेल कर देती हैं। ऐसी ही तकनीक का इस्तेमाल कर मैसूर के कलाकारों ने लकड़ियों को जोड़कर श्रीकृष्ण की रासलीला तैयार कर दी।
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प्रगति मैदान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले के दौरान  एम श्री निवासन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रगति मैदान में चल रहे अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में सदियों पुरानी कलाकृतियां लोगों को लुभा रही हैं। इन्हें बनाने में पारंपरिक तकनीक का इस्तेमाल होता है, लेकिन देखने में यह थ्रीडी तस्वीर को भी फेल कर देती हैं। ऐसी ही तकनीक का इस्तेमाल कर मैसूर के कलाकारों ने लकड़ियों को जोड़कर श्रीकृष्ण की रासलीला तैयार कर दी। मुरादाबाद के कलाकारों ने धातु की मदद से श्रीकृष्ण को जीवंत कर दिया। जबकि बिहार के कलाकारों ने मिट्ट़ी पर चित्र बनाकर शिव विवाह को दर्शाया है। बिहार के ही कलाकारों ने माथे पर चमकने वाली टिकुली के सहारे आम जनजीवन को लकड़ी के टुकड़े पर उकेरा गया है।

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कर्नाटक पेवेलियन में आए मैसूर के कलाकार एम श्रीनिवास ने बताया कि उन्होंने यहां वुड इनले कलाकृति को प्रस्तुत किया है। इसमें लकड़ियों को काटकर ऐसे जोड़ा गया है कि अनूठी कलाकृति तैयार हो जाती है। अलग-अलग रंगों को हासिल करने के लिए अलग-अलग लकड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है। इस कलाकृति को बनाने में छह माह का समय लग जाता है। इसे बनाने में पांच से छह लोगों को धैर्य से काम करना होता है। पहले लकड़ियों को कुरेद कर आकार दिया जाता है। इसके बाद लाल चंदन, शीशम, रोज बुड, सफेद फाइबर, मुगुरची लड़की, मिल्क बुड सहित दूसरी लकड़ियों को काटकर कलाकृति तैयार की जाती है। यह करीब 200 साल पुरानी तकनीक है। मेले में प्रदर्शित श्रीकृष्ण की रासलीला को छह माह में तैयार किया गया है। वहीं, मुरादाबाद से आए कलाकारों ने बताया कि धातु कारीगरी की मदद से प्रतिमाओं का निर्माण किया है। सैकड़ों साल से इन्हीं तकनीक की मदद से प्रतिमा बनाए जा रही हैं। उत्तर प्रदेश पवेलियन में इन्हें प्रदर्शित किया गया है।

बिहार पवेलियन में टिकुली आर्ट
बिहार पैवेलियन में पद्मश्री अशोक कुमार बिश्वास ने टिकुली आर्ट को प्रदर्शित किया है। उन्होंने कहा कि इस कला को लोग पसंद कर रहे हैं। इसमें कांच सहित अन्य सामग्रियों से बनी हुई छोटी-सी वस्तुओं को जोड़कर सजावटी कलाकृतियों तैयार की जाती हैं। धीरे-धीरे इसमें घरों में इस्तेमाल होने वाले रंगों का भी इस्तेमाल होने लगा है। नीतू सिन्हा ने बताया कि टेराकोटा आर्ट से शिव विवाह को मेले में प्रदर्शित किया है। यह प्राचीन कृतिकार शैली है। इसमें मिट्टी की मदद से कलाकृतियों को तैयार किया गया। पद्मश्री शांति देवी ने मैथली पेंटिंग प्रस्तुत की। इसमें पारंपरिक और लोककला को प्रस्तुत किया गया है।
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मछली नहीं खाते तो बिस्कुट खाइए
मछली में मिलने वाला प्रोटीन चाहिए और मछली खाना भी नहीं चाहते तो आपके लिए बिस्किट तैयार हैं। यह देखने में सामान्य बिस्किट हैं, लेकिन इन्हें मछली से तैयार किया गया है। पंजाब पवेलियन में वेटरनरी यूनिवर्सिटी से आए डॉ. विजय रेड्डी ने बताया कि डॉक्टर कई लोगों को मछली खाने की सलाह देते हैं, लेकिन उसकी दुर्गंध के कारण उसे खाना पसंद नहीं करते। ऐसे में विवि ने मछली को सुखाकर उसका पाउडर तैयार किया और उसकी मदद से पास्ता व बिस्किट तैयार किया गया है। इसमें कोई दुर्गंध नहीं है और सारे प्रोटीन हैं।

मेले के साथ कला कुंभ भी है ट्रेड फेयर
प्रगति मैदान में लगा अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला केवल उत्पादों का ही नहीं, बल्कि कला का भी कुंभ है। यहां बने एंफीथिएटर में रोजाना सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कलाकारों की प्रस्तुतियां होंगी।

शुक्रवार शाम मेले के फोकस राज्य झारखंड से आए कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से सभी को भाव विभोर कर दिया। उनसे पहले अर्चना और सुहाना की कविताओं ने मंच पर छटा बिखेरे रखी।आ ने वाले दिनों के कार्यक्रमों में पंजाब के सूरिंदर सागर द्वारा पंजाबी गायन, झारखंड की डॉ. अनु सिन्हा द्वारा कथक नृत्य, हरियाणा के जतिंदर सिंह बब्बर द्वारा जादू शो, राजस्थान व उत्तर प्रदेश के कलाकारों का कथक नृत्य, मध्य प्रदेश, मणिपुर, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, दिल्ली, ओडिशा, असम, जम्मू और कश्मीर, आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, पंजाब समेत अन्य दूसरे राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के कलाकारों द्वारा विभिन्न प्रस्तुतियां दी जाएंगी। कार्यक्रमों का आयोजन रोजाना दो सत्रों में किया जाएगा, जिनमें से एक दोपहर तीन बजे से 4:30 बजे तक और दूसरा शाम छह बजे से 7:30 बजे तक होगा।

राज्यों के पवेलियन में भी है धूम
एंफीथिएटर के अलावा प्रगति मैदान स्थित सभी पवेलियन में कलाकारों ने दर्शकों को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। शुक्रवार दोपहर जब पंजाब पवेलियन में लोग शॉपिंग करने पहुंचे, तब अचानक ढोल व अन्य पंजाबी वाद्यों के साथ कुछ कलाकार वहां आ गए। जैसे ही उन्होंने ढोल पर पंजाबी लोकगीत गाने शुरू किए, लोग अपनी शॉपिंग छोड़कर कलाकारों के साथ भांगड़ा करने पहुंच गए। लोग पंजाबी गीतों पर खूब झूमे। इसी तरह उत्तराखंड पवेलियन में लोगों ने पिथौरागढ़ जिले के लोक नृत्य छलिया का लुत्फ उठाया।

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