दिल्ली में तंबाकू पर पूरी पाबंदी लगा दी गई है। तंबाकू का उत्पादन, बिक्री, प्रदर्शन, परिवहन और भंडारण अब गैर कानूनी माना जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन ने कहा कि 30 मार्च से प्रतिबंध लागू हो जाएगा। हालांकि उसके पहले अगर अधिसूचना आ आई तो लागू मानी जाएगी।
मंत्री ने कहा कि कानून का उल्लंघन करने वाले पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक नियम 2011 के तहत कार्रवाई होगी। इसमें सात साल तक की सजा व दस लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। प्रतिबंध लागू करने केलिए पुलिस, स्वास्थ्य टीमें और खाद्य सुरक्षा विभाग की मदद ली जाएगी।
राजधानी में 11 सितंबर 2012 से गुटखा, तंबाकू या निकोटिन वाले पान मसाला की बिक्री पर प्रतिबंध लागू है। खाद्य सुरक्षा कानून की कमजोरियों की आड़ में गुटखा निर्माता कंपनियां गुटखे को सादा पान मसाला और तंबाकू के अलग-अलग पैकेट बनाकर बेच रहे हैं। जिसे उपभोक्ता मिलाकर खाते हैं। यह प्रतिबंध के दायरे में नहीं था। महाराष्ट्र समेत कुछ अन्य राज्यों ने चबाने वाले तंबाकू की किसी भी रूम में बिक्री, भंडारण या उत्पादन पर पाबंदी लगाई हुई है।
दिल्ली सरकार ने चबाने वाले तंबाकू से कैंसर समेत अन्य बीमारियों का जिक्र करके उस पर होने वाले खर्च का हवाला देते हुए प्रतिबंध लगाया है। इससे फेफड़ों के कैंसर के मरीज बढ़ रहे हैं। बेशक इससे राजस्व मिलता है, लेकिन इलाज का खर्च उससे कहीं अधिक है। उपराज्यपाल के पास फाइल करीब छह महीने से पड़ी थी, जिसे अब स्वीकृति मिल गई है।
दिल्ली से पहले मध्य प्रदेश, केरल, हरियाणा, बिहार, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान तथा गोवा तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर रोक लगा चुके हैं। सरकार को गुटखा व चबाने वाले तंबाकू की बिक्री से करीब 200 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है।