सेना के स्पेशल कमांडो द्वारा किया जाने वाला सर्जिकल स्ट्राइक टॉप सीक्रेट होती है। यहां तक की अभियान में शामिल होने वाले कमांडो को भी इस बाबत कोई जानकारी नहीं होती।
जब वह निर्धारित स्थान पर पहुंच जाते हैं या फिर हेलीकॉप्टर अथवा जहाज में सवार हो जाते हैं तब उन्हें बटालियन कमांडर और प्लाटून कमांडर द्वारा मिशन की जानकारी दी जाती है।
ये बात रक्षा विशेषज्ञ फरीदाबाद निवासी और 1965 व 1971 में भारत पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध में सक्रिय रहे रिटायर्ड मेजर जनरल एसके दत्त ने अमर उजाला से बातचीत बताई।
1959 में भारतीय सेना के कुमाऊं रेजीमेंट में कमीशन लेने वाले मेजर जनरल दत्त ने बताया कि पहले लड़ाई के दौरान ही सेना
के कमांडो हिस्सा लेते थे।
लेकिन भारतीय सेना के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि पाकिस्तान के खिलाफ इस मिशन में अकेले कमांडो को ल गाया गया।
उन्होंने जोर देकर कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक के तहत मिशन की जानकारी कुछ चुनिंदा सैन्य अफसरों को ही होती है। मिशन को सेनाअध्यक्ष और डीजीएमओ तय करते हैं।
बटालियन कमांडर और प्लाटून कमांडर मिशन को कामयाब बनाते हैं। मिशन में शामिल होने कमांडो को अंतिम क्षण में जानकारी दी जाती है।
यहां तक कि प्लेन के पायलट को भी मिशन की जानकारी से दूर रखा जाता है। मेजर जनरल ने बताया कि इजराइल अपने देश की सुरक्षा के लिए इसी रणनीति को अंजाम देता है। क्योंकि वह चारों ओर से मुस्लिम राष्ट्र से घिरा हुआ है।
पाक के पास नहीं है लड़ाई का विकल्प: दत्त ने दावा है कि पाकिस्तान के पास अभी लड़ाई का कोई विकल्प नहीं है। क्योंकि आतंकवाद को लेकर वह दुनिया में अलग-थलग पड़ चुका है।
फिर भी वह सर्जिकल स्ट्राइक का बदला ले सकता है। उसके पास भी स्पेशल कमांडो हैं। यही नहीं अपनी अवाम संतुष्ट करने के लिए वह बॉर्डर पर बमबारी कर सकता है।
कुछ आतंकियों के स्पीपर माड्यूल को भी भेज सकता है। उन्होंने भारतीय सैन्य कमांडो के इस कार्रवाई को अदम्य और अतुलनीय बताया है।