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कोर्ट ने खारिज की तोमर की जमानत याचिका

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अदालत ने फर्जी डिग्री मामले में आरोपी पूर्व कानून मंत्री जितेन्द्र सिंह तोमर को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि मामले की जांच अभी आरंभिक स्थिति में है और ऐसी परिस्थितियों में जमानत नहीं दी जा सकती।
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साकेत अदालत स्थित अतिरिक्त मुख्य मैट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट तरुण योगेश ने दिल्ली पुलिस के उस तर्क को स्वीकार कर दिया कि यदि आरोपी तोमर को जमानत प्रदान की गई तो वह साक्ष्यों से छेड़छाड़ व गवाहों को प्रभावित कर सकता है।

तोमर वर्तमान में तिहाड़ जेल में है। इससे पूर्व तोमर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश गुप्ता ने तर्क रखा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और ऐसे में उनके मुवक्किल को जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है।
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उन्होंने कहा कि तोमर दिल्ली का निवासी है और उसके फरार होने की संभावना भी नहीं है।
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'जांच हित में न दी जाए जमानत'

वहीं, दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अधिवक्ता अतुल श्रीवास्तव ने उनके तर्क पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मामले की जांच आरंभिक स्थिति में है और जिस प्रकार तोमर ने फर्जी डिग्रियां बनवाई है

उससे स्पष्ट है कि जमानत मिलने पर वह साक्ष्यों को नष्ट कर सकता है। अत: जांच हित में उसे जमानत न दी जाए। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद जमानत याचिका खारिज कर दी।

पुलिस ने आठ जून को तोमर के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे 9 जून को गिरफ्तार कर लिया था। करीब 12 दिन रिमांड पर लेने के बाद तोमर को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
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