राजनीति में पर्दे के पीछे क्या होता है, इसकी सच्चाई हर कोई जानना चाहता है।
मंझे हुए राजनीतिक लोग कोई न कोई ऐसा पेंच फंसा ही देते हैं जिससे मजबूर होकर फैसले बदल दिए जाते हैं। ऐसा ही कुछ गौतमबुद्धनगर की सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी का हुआ है।
रमेश चंद्र तोमर को टिकट देने के पीछे राजबब्बर का रूठना भी रहा। अन्यथा अंत समय तक धीरेंद्र सिंह को टिकट मिलने की अटकलें चलती रहीं।
राजनीतिक सूत्रों ने जानकारी दी है कि रमेश चंद्र तोमर शुरू से ही कह रहे थे कि वह गाजियाबाद से ही कांग्रेस की तरफ से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
यह भी पढ़ें: 'सिब्बल एक्वागार्ड बांट रहे हैं'
बीच में जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के बारे में यह तय हो गया कि वह अब गाजियाबाद से चुनाव नहीं लड़ेंगे तो कांग्रेस ने राजबब्बर को गाजियाबाद से चुनाव लड़ाने का मन बनाया।
चूंकि तोमर भी पार्टी से टिकट मांग रहे थे और दूसरे दावेदार राजबब्बर भी मैदान में आ गए। इस पर तोमर ने साफ कह दिया कि उन्हें हर हाल में चुनाव लड़ना है।
अगर गौतमबुद्धनगर से टिकट दे दिया जाए तो वह शांत हो जाएंगे। अन्यथा वह राजबब्बर को हराने का काम करेंगे। यह बात हाईकमान तक पहुंचा दी गई।
राजबब्बर ने पार्टी से कहा कि अगर उन्हें गाजियाबाद से चुनाव लड़ाना है तो तोमर को गौतमबुद्धनगर से टिकट दे दो ताकि वह विरोध न करें, इस बात पर एक बार कांग्रेस ने मना कर दिया तो सूत्र बताते हैं कि राजबब्बर रूठ गए। स्टार प्रचारक और अभिनेता राजबब्बर के रूठते ही हाईकमान को उनकी शर्त माननी पड़ी।
यह भी पढ़ें: दिल्ली NCR में आम चुनाव के लिए नामांकन आज से
दरअसल, जब भट्टा पारसौल किसान आंदोलन के दौरान गोलीकांड हुआ था तो राहुल गांधी रबूपुरा के कद्दावर नेता ठाकुर धीरेंद्र सिंह के साथ मोटर साइकिल पर सवार होकर मौके पर गए थे। उन दिनों धीरेंद्र की राहुल से नजदीकियां काफी चर्चित रही थीं।
यही कारण रहा कि 2012 में जब विधान सभा के चुनाव हुए तो जेवर से टिकट धीरेंद्र को मिला और भले ही वह दूसरे नंबर पर रहे हों लेकिन अच्छे वोट पाए थे। उसी वक्त राहुल ने धीरेंद्र से कह दिया था कि वह लोकसभा की तैयारी शुरू कर दें।
तब से लेकर धीरेंद्र कभी नोएडा तो कभी ग्रेनो क्षेत्र में लोगों की समस्याओं को लेकर धरना प्रदर्शन समेत लोगों से मिलना जुलना जारी रखे हुए थे। लेकिन राजनीतिक पेंचीदगियों के चलते उनका टिकट से पत्ता कट गया।