संगठन की शिकायत के बावजूद ऑनलाइन फार्मेसी द्वारा आई-पिल, एमटीपी किट, एंटी-डिप्रेशन आदि दवाइयों की सप्लाई जारी है। इसके लिए डॉक्टरी पर्चे व मरीज की विश्वसनीयता की भी पुष्टि नहीं की जा रही है। सरकार को शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
जंतर-मंतर पर गरजेंगे दवा व्यापारी
शुक्रवार को ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट् एंड ड्रगिस्ट्स (एआईओसीडी) की अपील पर 12 हजार से अधिक दवा दुकानदार जंतर मंतर पर एकत्रित होंगे और ऑनलाइन फॉर्मेसी के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।
इन मांगों को लेकर कर रहे विरोध
. मौजूदा ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के प्रावधानों तथा 1945 के नियमों के मुताबिक अवैध दवाइयों की बिक्री गैरकानूनी है।
. घटिया, सस्ते ब्रांड वाली और नकली दवाओं की खुलेआम बिक्री होने लगेगी।
. दवाइयों के अनियंत्रित इस्तेमाल का खतरा बढ़ेगा।
. युवाओं में नशे की लत बढ़ने का बड़ा खतरा रहेगा।
. आठ लाख केमिस्टों तथा तकरीबन 80 लाख कर्मचारियों एवं परिवारों के लिए आर्थिक संकट बढ़ेगा।
. ग्रामीण भारत में दवाइयों का दुष्प्रभाव बढ़ेगा।
. सुशासन के लिए अधोसंरचना तथा श्रमशक्ति का अभाव हो जाएगा।