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शिक्षा सुधार के लिए सरकार ने पास किए जरूरी बिल

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आम आदमी पार्टी सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए तीन बिल पास किए। इन बिलों का विपक्षी दल भाजपा के विधायकों ने विरोध किया।
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बिलों पर मतदान के समय भाजपा के दोनों विधायकों ने उनको शिक्षा के लिए नुकसानदायक करार देते हुए सदन का बहिष्कार किया। वहीं मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत आप के करीब एक दर्जन विधायकों ने तीनों बिलों को शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए मील का पत्थर करार दिया।

सदन में दिल्ली विद्यालय (लेखों की जांच और अधिक फीस की वापसी) बिल, दिल्ली विद्यालय (संशोधन) बिल और निशुल्क व अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (दिल्ली संशोधन) बिल पास किए।
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शिक्षकों को वेतन कम दिया जा रहा है

इस दौरान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तीनों बिलों को ऐतिहासिक करार दिया। उन्होंने कहा कि यह बिल शिक्षा के प्रति सरकार की गंभीरता, भ्रष्टाचार रोकने, सबको शिक्षा देने वाले है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा का सिस्टम ईमानदारी से चल नहीं सकता। निजी स्कूलों में फर्जीवाड़ा हो रहा है। बच्चों से काफी अधिक फीस ली जा रही है और शिक्षकों को वेतन कम दिया जा रहा है।

ऐसे में बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलने की उम्मीद नहीं की जा सकती। मगर इन बिलों के चलते ईमानदारी से शिक्षा दी जा सकती है।
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स्कूल मालिकों को व्यवसाय करने की खुली छूट दी गई है

उन्होंने कहा कि इन बिलों के तहत स्कूलों के खातों की जांच कराई जाएगी, c डोनेशन लेने वालों को जेल भेजा जाएगा।

उन्होंने एलान किया कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर बेहतर करने के साथ-साथ सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। इससे पहले विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया कि तीनों बिल शिक्षकों, अभिभावकों व बच्चों के विरोधी है।

सरकार ने स्कूल मालिकों से मिलकर उनके साथ षड्यंत्र रचा है। स्कूल मालिकों को व्यवसाय करने की खुली छूट दी गई है और वह कानूनी तौर पर शिक्षकों व अभिभावकों का शोषण कर सकेंगे।
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