दिल्ली सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री स्ट्रीट लाइट योजना की घोषणा की है। इस योजना के तहत शहर के अंधेरे स्थलों को चिह्नित कर एलईडी लाइटें लगाई जाएंगी। इस योजना को सरकार एक नवंबर से लागू करेगी। इसके तहत दिल्ली में लगभग दो लाख दस हजार स्ट्रीट लाइटें लगेंगी।
इस योजना पर सरकार करीब सौ करोड़ रुपये खर्च करेगी। लाइट लगाने की जिम्मेदारी बिजली कंपनी की होगी। इसमें 20-40 वाट की एलईडी लाइटें लगेंगी। तीन से पांच साल तक स्ट्रीट लाइट के मेंटेनेंस की जिम्मेदारी सप्लायर कंपनी की होगी। रखरखाव पर प्रति वर्ष दस करोड़ रुपये खर्च होंगे।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बताया कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली सरकार प्रतिबद्ध हैं। सीसीटीवी कैमरे तो लगाए जा रहे हैं। अब अंधेरे स्थलों को रौशन करने की भी तैयारी पूरी कर ली गई है। दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने और महिलाओं के खिलाफ अपराध कम करने के लिए यह एक प्रभावी कदम होगा।
योजना के तहत लाइट लगवाने की अनुमति विधायक देंगे। स्थानीय विधायक लोगों के सहयोग से अंधेरे स्थलों को चिह्नित करेंगे। भवन मालिक की अनुमति लेने के बाद बिजली कंपनी सर्वे करेगी। सर्वे में स्थान बिजली कंपनी की ओर से पास होने के बाद स्ट्रीट लाइट लगाया जाएगा। आम जनता भी विधायक से संपर्क कर स्ट्रीट लाइट लगवा सकेंगे।
ऑटोमेटिक होंगी लाइटें
योजना के तहत लगने वाली लाइटें आटोमेटिक होंगी। इसमें सेंसर लगा होगा, जो अंधेरा होने पर खुद जल जाएंगी। सूरज निकलने पर लाइट बंद हो जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार मुख्यमंत्री स्ट्रीट लाइट योजना के तहत दिल्ली में 2.1 लाख स्ट्रीट लाइटें लगेंगी। बिजली वितरण कंपनी 70 हजार स्ट्रीट लाइट लगाएगी। टाइमर और सेंसर की एलईडी लाइटें लगाई जाएंगी।
भवन मालिक के घर से मिलेगी बिजली
स्ट्रीट लाइट को भवन मालिक के घर से ही बिजली मिलेगी। एक-दो दिनों में यह तय कर लिया जाएगा कि एक लाइट पर कितनी बिजली खर्च होगी। फिर उतनी यूनिट बिजली को भवन मालिक के बिल से कम कर दिया जाएगा।
पोल लगाने की अनुमति मिलने में होती थी परेशानी
दिल्ली की कच्ची कॉलोनियों और झुग्गियों में जगह की कमी है। इन कॉलोनियों में एमसीडी से अनुमति मिलने में भी अड़चन आती थी। इस योजना में सिर्फ विधायक और भवन मालिक की अनुमति जरूरी होगी। लोग अपने घर, दुकान, गली, कहीं भी इसे लगवा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एमसीडी के कारण दिल्ली सरकार नहीं लगा पा रही थी स्ट्रीट लाइटें। दिल्ली में लाइटें लगाने के लिए एमसीडी से अनुमति आवश्यक है। एमसीडी से अनुमति नहीं मिलने के कारण सरकार की योजनाएं विफल साबित हो रही थी।
एमसीडी पर आरोप मढ़ते हुए सीएम ने कहा कि पिछले ढाई साल से आप विधायक स्ट्रीट लाइट लगवाने का प्रयास कर रहे थे। दिल्ली सरकार ने एमसीडी से बात की, फिर भी समाधान नहीं निकाला।
पहली बार इतने बड़े पैमाने पर लग रही हैं लाइटें
सरकार का दावा है कि पहली बार इतने बड़े पैमाने पर लाइटें सरकार की तरफ से लगाई जाएंगी। दिल्ली में अभी नौ लाख स्ट्रीट लाइटें हैं।
मुख्यमंत्री स्ट्रीट लाइट योजना के तहत दो लाख दस हजार स्ट्रीट लाइटें और लगेंगी।
यह दुनिया की पहली योजना है, जिसमें वर्तमान स्ट्रीट लाइट के करीब तीस फीसदी नई स्ट्रीट लाइट को लगाने का टेंडर दिया जाएगा। दिल्ली में महिलाओं के साथ अंधेरी जगहों पर वारदातें होती रहती हैं। इस खत्म करने में यह योजना कारगर साबित होगी।
दुनिया के बड़े शहरों में स्ट्रीट लाइटों का आंकड़ा सरकार ने किया पेश
दिल्ली - 9.10 लाख (2.10 लाख स्ट्रीट लाइट लगने के बाद)
न्यूयॉर्क - 4 लाख।
मुंबई - 1.5 लाख।
पेरिस - 2.8 लाख।
सिंगापुर -95 हजार।
शिकागो-3 लाख।
हॉगकांग-1.4 लाख।