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एक्वा लाइन पर रोज एक लाख यात्रियों को सफर कराने का लक्ष्य, 12 करोड़ रुपये प्रति माह का हो रहा घाटा

Mon, 23 Sep 2019 05:12 PM IST
पूजा त्रिपाठी सुशील पांडेय, अमर उजाला, नोएडा
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Aqua Line Metro
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नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएमआरसी) ने पहले चरण में नोएडा से ग्रेटर नोएडा के बीच एक्वा लाइन मेट्रो पर रोजाना एक लाख यात्रियों के चलने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मेट्रो की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) में इस आंकड़े के बाबत अनुमान का जिक्र है।

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हालांकि, अभी जितने लोग सफर कर रहे हैं उससे मिलने वाले राजस्व के बावजूद 12 करोड़ रुपये प्रति माह का घाटा मेट्रो को हो रहा है। इसकी भरपाई करने में वर्षों लग जाएंगे।

दरअसल, वर्तमान समय में एक्वा लाइन मेट्रो में रोजाना औसत 25 हजार यात्री सफर कर रहे हैं। वहीं इनकी अधिकतम राइडरशिप एक दिन में 30 हजार तक पहुंच चुकी है। इससे करीब 1.25 करोड़ से 1.5 करोड़ तक मेट्रो की कमाई हो रही है।
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एक अनुमान के मुताबिक, अगर राइडरशिप का आंकड़ा एक लाख यात्रियों तक भी पहुंच जाए तो भी यात्रियों की संख्या के आधार पर मेट्रो की कमाई पांच करोड़ से ज्यादा नहीं हो पाएगी। लिहाजा, घाटा पूरा करने के लिए अन्य उपाय करने होंगे। हालांकि, विशेषज्ञों की मानें तो इसके लिए कई अन्य फैक्टर भी जिम्मेदार हैं। इन कमियों को दूर करने के बाद ही मेट्रो का घाटा कम हो पाएगा।

यात्री बढ़ेंगे तो स्टेशनों पर शुरू होगी व्यावसायिक गतिविधि

मेट्रो के अधिकारियों की माने तो अभी यात्रियों की संख्या उतनी नहीं है कि स्टेशनों पर व्यावसायिक गतिविधियां शुरू की जाएं। हालांकि, जल्द ही इस तरह की गतिविधियां शुरू की जाएंगी। इससे मेट्रो को राजस्व की प्राप्ति होगी। इस तरह की गतिविधि सभी स्टेशनों पर शुरू होंगी।

केवल पब्लिक की सुविधा के लिए होते हैं प्रोजेक्ट
मेट्रो के अधिकारियों के मुताबिक कोई भी सरकारी प्रोजेक्ट जनता की सुविधा के लिए होता है। डीपीआर में एक अनुमान जरूर लगाया जाता है, लेकिन केवल घाटे या नफे से परियोजना शुरू नहीं की जाती है। इसके बावजूद पांच वर्ष तक समय असेसमेंट का होता है। इसके बाद प्रोजेक्ट रफ्तार पकड़ लेता है।

अभी क्षेत्र के विकसित होने में लगेगा समय
एक्वा लाइन मेट्रो कॉरिडोर पर कुल 21 स्टेशन हैं। यहां नोएडा में सेक्टर-51 से सेक्टर-135 तक ज्यादातर बसावट है। यानी लोग रह रहे हैं। इसके अलावा 142 पर भी बसावट है। यहां से मेट्रो को यात्री मिल रहे हैं, लेकिन इसके बाद नॉलेज पार्क-2 तक पूरा खाली है। यहां से यात्री नहीं मिल रहे हैं। वजह यह है कि यहां विकास नहीं हुआ है। यहां आसपास खेत और गांव है। सेक्टर-142, 143, 145, 148 में राइडरशिप कम है, लेकिन मेट्रो अधिकारियों की माने तो इसे भविष्य को देखकर बनाया गया है। अनुमान है कि भविष्य में लोग आएंगे।
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डीएमआरसी और एनएमआरसी के टिकट हो जाएंगे कॉमन

एनएमआरसी के अधिकारियों के मुताबिक , एनएमआरसी में टोकन सिस्टम नहीं है, बल्कि इससे एक कदम आगे बढ़ते हुए उन्नत किस्म की पर्ची वाला टिकट है। इस सिस्टम को डीएमआरसी भी अपनाने जा रहा है। इसके बाद एनएमआरसी और डीएमआरसी के टिकट कॉमन हो जाएंगे और यात्रियों को असुविधा नहीं होगी। इससे यात्रियों की संख्या भी बढ़ेगी।

लास्ट माइल कनेक्टिविटी का हो रहा प्रयास
यात्रियों के लास्ट माइल कनेक्टिविटी के लिए एनएमआरसी प्रयास कर रहा है। इसके लिए ई-रिक्शा और फीडर बसें लगाई गई हैं। स्टेशन से बाहर ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रों को कवर करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा एक्सप्रेसवे के दूसरी ओर की सोसाइटियों से लोगों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी हो सके। इसके लिए नोएडा प्राधिकरण की ओर से सेक्टर-142 मेट्रो स्टेशन के पास एफओबी की शुरुआत कराई जाएगी। सेक्टर-143 स्टेशन के पास एफओबी बन गया है। इसके अलावा दो एफओबी और बनने हैं।

पांच से दस वर्ष तक हो जाएगा सब बेहतर
एक अनुमान के मुताबिक, पांच से दस वर्ष में एक्वा लाइन पर यात्रियों की संख्या से लेकर व्यवसायिक गतिविधियां आदि पूरी तरह से ठीक हो जाएंगी। स्टेशनों का विकास हो जाएगा। इसके अलावा ग्रुप हाउसिंग के फ्लैटों पर कब्जे मिल जाए तो यात्री यहां से भी आएंगे।

एनएमआरसी ने शुरुआती दिन के 12 हजार यात्रियों से वर्तमान में 30 हजार तक का आंकड़ा छू लिया है। कॉरिडोर के आसपास के क्षेत्र विकसित होने और कनेक्टिविटी बढ़ने से यात्रियों की संख्या में इजाफा हो जाएगा।- पीडी उपाध्याय, कार्यकारी निदेशक, एनएमआरसी
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