हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पति या पत्नी दोनों में से कोई एक केवल इस आधार पर अलग होने का फैसला नहीं कर सकता कि ससुराल पहले किसने छोड़ा। अदालत ने कहा विवाहित जोड़े में से एक का आचरण दूसरे को अलग रहने के लिए बाध्य कर सकता है।
न्यायमूर्ति प्रदीप नंद्राजोग और न्यायमूर्ति योगेश खन्ना की खंडपीठ ने कहा कि अलग होना एक जगह से वापसी ही नहीं है। बल्कि यह विवाह के सभी कर्तव्यों का त्याग और पति या पत्नी में से किसी एक द्वारा बिना किसी उचित कारण या दूसरे की सहमति के बिना उसे छोड़ देना है।
खंडपीठ ने एक मामले में यह व्यवस्था देेते हुए परिवार अदालत के उस फैसले को खारिज कर दिया जिसमें पत्नी द्वारा अलग होने के आधार पर पति के हक में तलाक का निर्णय दिया था। पत्नी ने इस मामले में तलाक के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
खंडपीठ ने कहा रिकॉर्ड से पता चलता है कि पति ने अपीलकर्ता पत्नी को छोड़ा था जो कि आज तक अपने गुजारा भत्ते के लिए लड़ रही है। खंडपीठ ने कहा रिकॉर्ड में यह भी स्पष्ट है कि पत्नी के पास अलग रहने के लिए पर्याप्त आधार थे।